बिजली बोर्ड ने बिजली चोरी करने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। ट्रांसफार्मरों को दी जाने वाली सप्लाई और घरों में लगे मीटरों में पहुंच रही सप्लाई पर बोर्ड के मुख्यालय कुमार हाउस से नजर रखी जा रही है। डिजिटल सिस्टम से बोर्ड के अधिकारी ऑटोमेटिक मीटर रीडिंग सेंटर से इस पर नजर रख रहे हैं।
ट्रांसफार्मरों में मॉडम और सिम कार्ड लगाकर चेक रखा जा रहा है। मीटरों और ट्रांसफार्मर की रिडिंग में अंतर मिलने पर बिजली चोरी का पता लगेगा। केंद्र सरकार ने एक्सलरेटेड पावर डेवलपमेंट एंड रिफार्म्स प्रोग्राम (एपीडीआरपी) योजना के तहत फंडिंग की है। इसके तहत लोगों के बिजली मीटर रीडिंग में गड़बड़ी की शिकायत दूर होने के साथ-साथ बिजली चोरी करने वालों पर भी गाज गिरेगी।
योजना के तहत शहरी क्षेत्र में हर ट्रांसफार्मर के पास एक मॉडम फिक्स किया गया है। इसमें एक सिम कार्ड लगाई गई है। इस सिम के माध्यम से कुमार हाउस स्थित रिकवरी सेंटर में बैठे बोर्ड के कर्मचारी या अधिकारी पता लगा सकेंगे कि ट्रांसफार्मर के पास कितनी बिजली आ रही है और लोगों के घरों में कितनी बिजली की सप्लाई हो रही है।