हिमाचल में 15 जून के बाद बिजली की नई दरें घोषित होंगी। बिजली बोर्ड ने घाटे का हवाला देते हुए दरें बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। बीते दो साल से हिमाचल में घरेलू बिजली महंगी नहीं हुई है। बोर्ड की दलीलों और आय-व्यय के अंतर को देखते हुए इस साल बिजली दरें बढ़ सकती हैं। आजकल राज्य विद्युत नियामक आयोग नई दरें तय करने के काम में जुटा हुआ है। संभावित है कि 15 जून के आसपास नई दरों का खुलासा होगा।
प्रदेश में साल 2016 में घरेलू बिजली की दरें 3.5 फीसदी बढ़ाई गई थीं। इससे पूर्व साल 2014-15 में बिजली दरों को बढ़ाया गया था। साल 2017-18 में चुनावी साल होने के चलते दरों में कोई इजाफा नहीं हुआ। 2018-19 में लगातार दूसरे साल भी प्रदेश में घरेलू बिजली की दरें नहीं बढ़ी थीं। ऐसे में संभावित है कि हिमाचल में इस साल बिजली महंगी हो सकती है।
राज्य बिजली बोर्ड को अपने खर्च पूरे करने के लिए साल 2019-20 में 5801.58 करोड़ राजस्व की जरूरत है। साल 2018-19 के मुकाबले बोर्ड का खर्च 512.32 करोड़ रुपये बढ़ने की संभावना है। बीते सालों के घाटे को जोड़ लिया जाए तो बिजली बोर्ड को साल 2019-20 में 6451.52 करोड़ की जरूरत है।
बोर्ड के मुताबिक बीते सालों के घाटे को पूरा करने के लिए 1062.26 करोड़ की आवश्यकता है। इन बिंदुओं के आधार पर ही बोर्ड ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में रिव्यू पिटीशन दायर की है। बिजली बोर्ड का खर्च बढ़ने, आय कम होने और बीते दो सालों से दरें नहीं बढ़ने की दुहाई देते हुए आर्थिक स्थिति को खराब बताया गया है। बीते दिनों आयोग ने इस बाबत जन सुनवाई भी कर ली है।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक 15 जून तक नई दरें तय कर ली जाएंगी। पहली अप्रैल 2019 से नई दरें लागू होंगी। उपभोक्ताओं से बैकडेट से बढ़ी हुई दरों पर शुल्क आने वाले महीनों के बिजली बिलों में एडजस्ट किया जाएगा।