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अच्छी खबर! बोर्ड परीक्षा में कंपार्टमेंट को खत्म करने की तैयारी

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शिक्षा अधिकारियों ने हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में कंपार्टमेंट को खत्म करने की सिफारिश की है। प्राथमिक पाठशालाओं में प्री नर्सरी शुरू करने और पहली कक्षा से अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है। इन तमाम सुझावों को तीस साल बाद जन सहभागिता से तैयार की गई नई शिक्षा नीति में शामिल किया जा रहा है।
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इस नए प्लान को अब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को भेजा जाएगा। मंगलवार को राज्य शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों और कॉलेज प्रिंसिपलों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी सिफारिशों को सीधे केंद्र की वेबसाइट पर अपलोड करें। नई शिक्षा नीति के तहत माध्यमिक कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने की सिफारिश की गई है।

नई शिक्षा नीति बनाने के लिए हिमाचल सरकार ने प्रदेश के हर वर्ग से राय ली है। पंचायत, जिला परिषद प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से चर्चा की गई है। इन सभी वर्गों से लिखित सुझाव लिए गए हैं। हिमाचल में तीस साल बाद नई शिक्षा नीति जन सहभागिता से बनाई गई है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल बिंटा ने इसकी पुष्टि की है।
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ये हैं सिफारिशें

1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपनी शिक्षा नीति के जरिये शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की पहल की थी। पहली बार तकनीकी शिक्षा का विकास हुआ और एजुकेशन में निजीकरण को बढ़ावा मिला। लेकिन यहीं से एक बड़ी समस्या भी पैदा हुई। प्राइवेट स्कूलों और निजी तकनीकी संस्थानों का जाल बढ़ता गया और क्वालिटी एजुकेशन महंगा और सामान्य वर्ग से दूर होता गया। केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए नई शिक्षा नीति बनाने का फैसला लिया है।

ये हैं सिफारिशें
पहली से आठवीं कक्षा तक परीक्षा पैट्रन दोबारा शुरू हो।
अंग्रेजी मीडियम को पहली कक्षा से शुरू करना चाहिए।
प्राथमिक पाठशालाओं में प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू हो।
मिड डे मील योजना को बंद कर बिना पका राशन वितरण हो।
अध्यापकों की नियुक्तियां एसएमसी की बजाए अधीनस्थ चयन बोर्ड से हो।
परीक्षाओं में कंपार्टमेंट देने की व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
शिक्षकों का हर साल प्रोफेशनल डेवलेपमेंट का कोर्स हो।
आईसीटी लैब में प्रशिक्षित शिक्षकों और स्टाफ की नियुक्ति हो।
विज्ञान और गणित विषय को रोचक बनाकर पढ़ाया जाए।
रट्टा लगाने की प्रथा खत्म हो, सहज ही समझने को प्रोत्साहित करें
प्राथमिक स्कूलों से ही विषय विशेषज्ञ को तैनात किया जाए
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