शिमला के केएनएच में बच्चों को बदलने के बाद अस्पताल के लेबर रूम में नयी व्यवस्था शुरू हो गई है। एचओडी संतोष मिन्हास का कहना है कि अब एक समय में सात डॉक्टरों की टीम लेबर रूम में काम संभाल रही है। जिसमें कि दो सीनियर डॉक्टर, पांच जेआर डॉक्टर और एक ऑन कॉल डॉक्टर ड्यूटी दे रहे हैं। अगर लेबर रूम की परिस्थिति ज्यादा गंभीर होती है तो इसके लिए भी एक डॉक्टर यहां पर सेवा देगा।
अस्पताल में बच्चे बदलने की शिकायत आने के बाद जुलाई माह से यह सुविधा शुरू कर दी है। नर्सिंग सुपरिटेडेंट का कहना है कि लेबर रुम में तीनों समय तीन तीन स्टाफ नर्स ड्यूटी देंगी। विभाग का दावा है कि बच्चों के बदलने की शिकायत के बाद चार जुलाई से यह व्यवस्था शुरू की गई है। अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चे के जन्म के बाद नवजात के पैरों के निशान और मां के अंगुठे का निशान भी फार्म पर लिया जा रहा है। जिससे कि आगे भी इस तरह की स्थिति न हो। इससे पहचान के रुप में रखा जा रहा है।
बच्चा बदलने से पहले यह थी सुविधा
लेबर रूम में एक एसआर, तीन जेआर और शाम के समय भी इसी कॉर्डिनेशन में डॉक्टर ड्यूटी देते थे। जबकि एक ऑन कॉल डाक्टर होता था। अब दो एसआर, शाम के समय पांच जेआर डॉक्टर और एक ऑनकॉल डॉक्टर ड्यूटी पर होेगा।
लेबर रुम में आ सकती हैं अटेंडेट
अस्पताल के लेबर रूम में अटेडेंट को आने की सुविधा दी गई है। जबकि मेल को न्यूनेटल रेसूसिएशन कार्नर में जाने दिया जाता है जोकि लेबर रुम और अन्य रुम के बीच में है।