भूमि पर है ये संस्थान
इस भूमि में इस समय मेडिकल कॉलेज, कृषि, बागवानी, एग्रो इंडस्ट्री, पशुपालन विभाग, लघु सचिवालय, उपमंडलाधिकारी आदि के कार्यालय, स्टोर, भवन तथा स्टाफ के रिहायशी भवन हैं। जबकि अन्य भूमि को निजी लोगों को नीलाम कर दिया गया है। उन्होंने आगे इन जमीनों को बेच दिया है। हालांकि इस पूरी संपत्ति की कीमत करीब 50 हजार करोड़ हो सकती है, लेकिन याचिकाकर्ता इस मामले को बीच का रास्ता अपना कर सुलझाने के इच्छुक हैं। ऐसे में उन्होंने करीब 10 अरब रुपये की मुआवजा राशि जमीन और नकदी के रूप में मांगी है।
झटींगरी में नहीं लेंगे जमीन : याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से जो जमीन झटींगरी में तबादले के रूप में देने की पेशकश है, वो कदापि सही नहीं है, क्योंकि उनकी भूमि की कीमत इस समय करीब 15 लाख रुपये बिस्वा है, जबकि प्रस्तावित भूमि की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बिस्वा है।