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Sirmour: न समझाैते का पालन न आस्था का ख्याल, यमुना में बह रहा नाममात्र पानी, बुद्धिजीवियों को सताने लगी चिंता

Mon, 03 Mar 2025 12:06 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, पांवटा साहिब(सिरमौर)

सार

यमुना नदी में सरकारी समझौते के अनुसार मुख्य नदी बेसिन में गर्मियों के मौसम में कम से कम 6 फुट बहता जल प्रवाह बनाए रखने की शर्त की अवहेलना हो रही है। 
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यमुना में बह रहा नाममात्र पानी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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न समझाैते का पालन न आस्था का ख्याल। गुरु की नगरा पांवटा साहिब से होकर गुजरने वाली मोक्षदायिनी पवित्र यमुना नदी में नाममात्र का पानी रह गया है। यमुना नदी में सरकारी समझौते के अनुसार मुख्य नदी बेसिन में गर्मियों के मौसम में कम से कम 6 फुट बहता जल प्रवाह बनाए रखने की शर्त की अवहेलना हो रही है। वर्तमान स्थिति में जल प्रवाह की कमी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। इससे क्षेत्र के बुद्विजीवी व विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि चिंतित हैं। मार्निंग जॉगर्स क्लब पांवटा साहिब अध्यक्ष डॉ. एनपीएस नारंग, मधुकर डोगरी, राधाकृष्ण मंदिर समिति प्रधान एसएस गुप्ता, गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी पूर्व मैनेजर कुलवंत सिंह चौधरी, जगन्नाथ ट्रस्ट पांवटा प्रधान हरविंद्र सिंह, रोटरी क्लब प्रधान महेश खुराना, वरिष्ठ नागरिक संघ पांवटा, इनरव्हील क्लब, पंजाबी बिरादरी व पेंशनर संघ पांवटा ने यमुना नदी का निरंतर कम होते जल स्तर पर चिंता प्रकट की है।

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करीब साढ़े पांच दशक पहले पांवटा के लोगों ने उत्तर प्रदेश (अब उत्तराखंड) को नदी से नहर व बिजली प्रोजेक्ट को पानी ले जाने पर विरोध जताया था। इससे हिमाचल के पांवटा साहिब गुरुद्वारा के समीप पवित्र स्नान को पानी नहीं पहुंचने की शिकायत की गई। तब केंद्र सरकार व उतर प्रदेश सरकार के सहयोग से यमुना नदी में वीयर योजना तैयार की गई थी। डॉ. एनपीएस नारंग व कुलवंत चौधरी ने बताया कि समझौते के अनुसार गर्मियों में भी बहता 6 फुट पानी छोड़ने की शर्त रखी गई। घाट पर यमुना नदी का जल स्तर अत्यधिक गिर चुका है। वह अब एक नाले की तरह दिखता है। सरकारी समझौते के अनुसार मुख्य नदी बेसिन में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखना अनिवार्य है, परंतु वर्तमान स्थिति में जल प्रवाह की कमी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।

मुख्य नदी बेसिन में जल प्रवाह की कमी, प्राकृतिक एवं मानवनिर्मित कारणों से उत्पन्न विकार पूरे शहर के नालों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के यमुना में डाला जा रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या और बढ़ गई है। बैराज (वीयर योजना) कई वर्षों से बंद पड़ा है, जबकि इसे नदी में उचित जल स्तर बनाए रखने के लिए बनाया गया था। यमुना का जल बिजली उत्पादन के लिए उत्तराखंड की नहरों में अधिक मात्रा में डाल दिया जा रहा है, जिससे जल स्तर पर और प्रभाव पड़ रहा है।
एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि मामला संज्ञान में लाया गया है। जिलाधीश सिरमौर के माध्यम से मुद्दा सरकार तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार से समस्या के समाधान पर मंथन हो सके।

करोड़ों की लागत से बनी वीयर योजना हो सुचारु
मधुकर डोगरी व एसएस गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन इसमें अहम भूमिका निभाए।यमुना मंदिर एवं गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब घाट के सामने दशकों पहले बनी वीयर योजना(बैराज) को सुचारु करवाया जाए ताकि फाटक से पानी को रोका जा सके। इससे सरकारी समझौते के अनुसार, मुख्य नदी बेसिन में पर्याप्त जल प्रवाह हो व नियमित निगरानी को कदम उठाए।
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अनुरोध एवं आगे की योजना : डॉ. नारंग
डॉ. एनपीएस नारंग ने कहा कि सभी संबंधित प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों और जल विभाग से निवेदन है कि यमुना नदी में आवश्यक जल स्तर बहाल करने, प्रदूषण नियंत्रण एवं बैराज की मरम्मत के साथ-साथ नहरों में उचित जल प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु तुरंत कार्रवाई करें। इस दिशा में उचित कदम उठाकर नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरणीय संतुलन को सुनिश्चित करें।
 
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