मुख्य नदी बेसिन में जल प्रवाह की कमी, प्राकृतिक एवं मानवनिर्मित कारणों से उत्पन्न विकार पूरे शहर के नालों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के यमुना में डाला जा रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या और बढ़ गई है। बैराज (वीयर योजना) कई वर्षों से बंद पड़ा है, जबकि इसे नदी में उचित जल स्तर बनाए रखने के लिए बनाया गया था। यमुना का जल बिजली उत्पादन के लिए उत्तराखंड की नहरों में अधिक मात्रा में डाल दिया जा रहा है, जिससे जल स्तर पर और प्रभाव पड़ रहा है।
एसडीएम पांवटा साहिब गुंजीत सिंह चीमा ने कहा कि मामला संज्ञान में लाया गया है। जिलाधीश सिरमौर के माध्यम से मुद्दा सरकार तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार से समस्या के समाधान पर मंथन हो सके।
करोड़ों की लागत से बनी वीयर योजना हो सुचारु
मधुकर डोगरी व एसएस गुप्ता का कहना है कि प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन इसमें अहम भूमिका निभाए।यमुना मंदिर एवं गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब घाट के सामने दशकों पहले बनी वीयर योजना(बैराज) को सुचारु करवाया जाए ताकि फाटक से पानी को रोका जा सके। इससे सरकारी समझौते के अनुसार, मुख्य नदी बेसिन में पर्याप्त जल प्रवाह हो व नियमित निगरानी को कदम उठाए।
अनुरोध एवं आगे की योजना : डॉ. नारंग
डॉ. एनपीएस नारंग ने कहा कि सभी संबंधित प्राधिकरणों, स्थानीय निकायों और जल विभाग से निवेदन है कि यमुना नदी में आवश्यक जल स्तर बहाल करने, प्रदूषण नियंत्रण एवं बैराज की मरम्मत के साथ-साथ नहरों में उचित जल प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु तुरंत कार्रवाई करें। इस दिशा में उचित कदम उठाकर नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरणीय संतुलन को सुनिश्चित करें।