प्रदेश के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों के लिए छात्र-छात्राओं को एक साल और इंतजार करना पड़ेगा।
राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड के दबाव के चलते शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2018-19 से पहली से पांचवीं कक्षा तक एनसीईआरटी का सिलेबस शुरू करने का फैसला वापस ले लिया है। अब एनसीईआरटी का सिलेबस साल 2019-20 से लागू होगा।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के पास पुराने पाठ्यक्रम की किताबों का भंडारण अधिक होने के चलते शिक्षा निदेशालय को अपने पूर्व के फैसले को बदलना पड़ा है। वर्तमान में पहली से पांचवीं के बच्चों को सरकारी स्कूलों में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) का सिलेबस पढ़ाया जा रहा है।
शैक्षणिक सत्र 2018-19 से लिया गया था लागू करने का फैसला
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय ने अप्रैल महीने में एनसीईआरटी के सिलेबस को अपनाने का फैसला लिया था। शैक्षणिक सत्र 2018-19 से इसे लागू करने का फैसला भी लिया गया था।
निदेशालय के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार ने भी मंजूरी दी थी। इसके बावजूद शिक्षा निदेशालय ने एनसीईआरटी की किताबों को लागू करने के फैसले को रद्द कर दिया है। निदेशालय के अफसरों के मुताबिक एसईआरटी की ओर से तैयार सिलेबस की बड़ी संख्या में किताबें बोर्ड के पास उपलब्ध हैं।
इन किताबों को सरकारी स्कूलों में निशुल्क में वितरित किया जाता है। बोर्ड को नुकसान की स्थिति से बचाने के लिए एनसीईआरटी के सिलेबस को एक साल के लिए टाल दिया गया है। उधर, राज्य परियोजना निदेशक एसएसए घनश्याम चंद ने बताया है कि एनसीईआरटी का सिलेबस कुछ कारणों के चलते 2018 की जगह 2019 से लागू किया जाएगा।
देश भर में बेहतर आंका जाता है एनसीईआरटी सिलेबस
एनसीईआरटी की किताबों को पूरे देश में सबसे बेहतर आंका जाता है। छठी कक्षा से हिमाचल के सरकारी स्कूलों में भी इन्हीं किताबों से पढ़ाया जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाने से शिक्षा में गुणात्मकता और एकरूपता आएगी। अगर पहली कक्षा से ही एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाया जाए तो विद्यार्थियों के लिए बेहतर होगा।
सरकारी स्कूलों में 28 हजार बच्चों का जांचा ज्ञान
एनसीईआरटी ने सोमवार को प्रदेश के 1951 स्कूलों में 28 हजार से ज्यादा बच्चों की नेशनल अचीवमेंट सर्वे के तहत परीक्षा ली। सर्वे में तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों का मूल्यांकन किया गया। स्कूली बच्चों का भाषा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषय का ज्ञान जांचा गया।
सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक घनश्याम चंद ने बताया कि एनसीईआरटी की ओर से इस परीक्षा का परिणाम प्रदेश में चल रही चुनाव आचार संहिता के समाप्त होने पर घोषित किया जाएगा।
नेशनल अचीवमेंट सर्वे की परीक्षा एनसीईआरटी की ओर से प्रतिपादित सीखने के प्रतिफल पर आधारित थी। इसमें प्राथमिक स्तर पर भाषा, गणित तथा पर्यावरण शिक्षा का मूल्यांकन किया गया। उच्च प्राथमिक स्तर पर भाषा, गणित, विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान का मूल्यांकन किया गया।
प्राथमिक स्तर के बच्चों से प्रति विषय 15-15 प्रश्न पूछे गए। इसके लिए 90 मिनट का समय दिया गया। आठवीं कक्षा के बच्चों को प्रति विषय 15-15 प्रश्न दिए गए। इसके लिए उन्हें 120 मिनट का समय दिया गया। दोनों ही स्तरों पर यह परीक्षा लिखित रूप में ली गई।
प्रदेश में परीक्षा एससीईआरटी और राज्य परियोजना निदेशालय सर्व शिक्षा अभियान की ओर से ली गई। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रदेश के करीब 350 शिक्षा अधिकारियों को नियुक्त किया गया।
राज्य परियोजना निदेशक घनश्याम चंद ने बताया कि इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सीखने संबंधी कमियों का पता लगाना तथा अधिगम कौशल विकास करना था। परिणाम आने पर कमियों को दूर करने के लिए राज्य स्तर पर ठोस नीति तैयार की जाएगी ताकि भविष्य में शिक्षा में गुणवत्ता लाई जा सके।