शारदीय नवरात्र पर हर दिन जहां मंदिरों में मां के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही वहीं वीरवार को दुर्गा अष्टमी पर घर-घर में कंजक पूजन हुआ। मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कालीबाड़ी, तारादेवी, कामना देवी, और ढिंगू मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह पांच बजे से ही पूजा शुरू हो गई। लोगों ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।
श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन करवाकर उपवास खोला। कंजक पूजन के लिए वीरवार को घरों में सुबह से ही प्रसाद बनाना शुरू कर दिया। घरों में बोई हुई जौ की पूजा अर्चना की गई। शहर में कई स्थानों पर कंजक पूजा के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। कई लोगों को कंजकें (छोटी कन्याएं) न मिलने से मंदिरों में जाकर पूजा करनी पड़ी।
मां का रूप मानी जाती हैं कन्याएं
पंचमुखी हनुमान मंदिर केलटी के पुजारी पंडित संजय शास्त्री के अनुसार कंजक भोज के बाद ही नवरात्र व्रत का परायण होता है। छोटी कन्याएं मां का रूप मानी जाती हैं। कन्याओं की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद माना जाता है।