कहा जाता है कि किसी भी पेशे की तुलना अध्यापन से नहीं की जा सकती। ये दुनिया का सबसे नेक कार्य है। अध्यापकों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका होती है। वे विद्यार्थियों सहित समग्र समाज के आदर्श होते हैं। देश और समाज के विकास का पैमाना मानव विकास होता है। शिक्षण की समृद्ध परंपराओं व उच्च सोच की बदौलत ही हमारे देश को विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है, जिसका श्रेय शिक्षकों को जाता है।
इन परंपराओं को पुनर्जीवित करने वाले शिक्षकों को पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत सम्मानित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह करेंगे। देवभूमि में शिक्षा की लौ जगाने को कई गुरुजनों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। सम्मानित होने वाले शिक्षक अन्य से किस तरह से अलग हैं और इनसे क्या सीख लेनी चाहिए? इस पर प्रस्तुत है अमर उजाला की रिपोर्ट...
सुंदरनगर के धनोटू निवासी कृष्ण चंद ने प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए हिंदी तथा स्नातक और पंजाब से व्याकारणाचार्य की डिग्री हासिल की है। 1994 में उन्हें राजकीय सीसे स्कूल जमणी में नियुक्ति मिली। राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी के रूप में इनके मार्गदर्शन में स्वयं सेवियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लिया।
उनकी उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2013 में हिमाचल सरकार द्वारा सर्वोच्च शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके अलावा वे 18वें राष्ट्रमंडल शिक्षा सम्मेलन मारीशस में 2012 तथा 7वीं एशिया पेसिफिक रीजनल अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन मलेशिया में 2013 में भाग लेने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।
नरेश शास्त्री, सीसे चुराग, करसोग (मंडी)
नरेश शास्त्री को 2004 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इन्होंने अपनी सेवाएं मंडी जिला के कमांद स्कूल से शुरू की थीं। शिक्षा के क्षेत्र में 38 वर्षों तक श्रेष्ठ कार्य करने के बाद उनका चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए हुआ है। वह दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन, अब राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन होने के बाद उनको दो वर्ष और सेवा विस्तार मिल रहा है। उन्होंने छात्राओं के लिए स्कूलों में अलग से शौचालय बनाने व स्वच्छता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य भी किया है।
श्याम लाल, केंद्रीय पाठशाला डियारा (बिलासपुर)
श्याम लाल केंद्र मुख्य शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें यह अवार्ड उनकी बेहतर सेवाओं के लिए दिया जा रहा है। वे इससे पूर्व वर्ष 2010 में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षक राज्य पुरस्कार से भी नवाजे जा चुके हैं। वहीं अक्तूबर, 2015 में यूनेस्को द्वारा महाराष्ट्र में ग्लोबल टीचर रोल मॉडल अवार्ड से भी श्याम लाल को नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर लेखक संघ, व्यास उत्सव समिति, दिव्य मानव ज्योति संस्थान मंडी, समर्पण सामाजिक संस्था सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाएं इन्हें विभिन्न अवार्डों से सम्मानित कर चुकी हैं।
भूपेंद्र गुप्ता, सीसे भूमति सोलन
सामाजिक सरोकार के साथ-साथ जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता के लिए हमेश हाथ बढ़ाने वाले भूपेंद्र गुप्ता वर्तमान में भूमति स्कूल के प्रधानाचार्य हैं। इन्होंने स्कूली छात्रों को सड़क दुर्घटना से सुरक्षा के लिए प्रदेश का पहला ओवरब्रिज निर्माण किया जिससे सड़क के दो ओर स्थित स्कूल के दो परिसरों को जोड़ा है। स्कूल के हमेशा अव्वल रहे हैं। विभिन्न गतिविधियों में भूमति स्कूलों के छात्रों ने प्रदेश एवं नेशनल स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है।