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शिक्षा की लौ जगाने को इन्होंने समर्पित कर दिया जीवन, मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

Sun, 04 Sep 2016 06:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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कहा जाता है कि किसी भी पेशे की तुलना अध्यापन से नहीं की जा सकती।  ये दुनिया का सबसे नेक कार्य है। अध्यापकों की राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका होती है। वे विद्यार्थियों सहित  समग्र समाज के आदर्श होते हैं। देश और समाज के विकास का पैमाना मानव विकास होता है। शिक्षण की समृद्ध परंपराओं व उच्च सोच की बदौलत ही हमारे देश को विश्व गुरु के रूप में जाना जाता है, जिसका श्रेय शिक्षकों को जाता है।
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इन परंपराओं को पुनर्जीवित करने वाले शिक्षकों को पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत सम्मानित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह करेंगे। देवभूमि में शिक्षा की लौ जगाने को कई गुरुजनों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। सम्मानित होने वाले शिक्षक अन्य से किस तरह से अलग हैं और इनसे क्या सीख लेनी चाहिए? इस पर प्रस्तुत है अमर उजाला की रिपोर्ट...

सुंदरनगर के धनोटू निवासी कृष्ण चंद ने प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए हिंदी तथा स्नातक और पंजाब  से व्याकारणाचार्य की डिग्री हासिल की है। 1994 में उन्हें राजकीय सीसे स्कूल जमणी में नियुक्ति मिली। राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी के रूप में इनके मार्गदर्शन में स्वयं सेवियों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लिया।
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उनकी उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2013 में हिमाचल सरकार द्वारा सर्वोच्च शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया है। इसके अलावा वे 18वें राष्ट्रमंडल शिक्षा सम्मेलन मारीशस में 2012 तथा 7वीं एशिया पेसिफिक रीजनल अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन मलेशिया में 2013 में भाग लेने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।

नरेश शास्त्री, सीसे चुराग, करसोग (मंडी)
नरेश शास्त्री को 2004 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इन्होंने अपनी सेवाएं मंडी जिला के कमांद स्कूल से शुरू की थीं। शिक्षा के क्षेत्र में 38 वर्षों तक श्रेष्ठ कार्य करने के बाद उनका चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए हुआ है। वह दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन, अब राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन होने के बाद उनको दो वर्ष और सेवा विस्तार मिल रहा है। उन्होंने छात्राओं के लिए स्कूलों में अलग से शौचालय बनाने व स्वच्छता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य भी किया है।

श्याम लाल, केंद्रीय पाठशाला डियारा (बिलासपुर)
श्याम लाल केंद्र मुख्य शिक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें यह अवार्ड उनकी बेहतर सेवाओं के लिए दिया जा रहा है। वे इससे पूर्व वर्ष 2010 में हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षक राज्य पुरस्कार से भी नवाजे जा चुके हैं। वहीं अक्तूबर, 2015 में यूनेस्को द्वारा महाराष्ट्र में ग्लोबल टीचर रोल मॉडल अवार्ड से भी श्याम लाल को नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त बिलासपुर लेखक संघ, व्यास उत्सव समिति, दिव्य मानव ज्योति संस्थान मंडी, समर्पण सामाजिक संस्था सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाएं इन्हें विभिन्न अवार्डों से सम्मानित कर चुकी हैं।

भूपेंद्र गुप्ता, सीसे भूमति सोलन
सामाजिक सरोकार के साथ-साथ जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता के लिए हमेश हाथ बढ़ाने वाले भूपेंद्र गुप्ता वर्तमान में भूमति स्कूल के प्रधानाचार्य हैं। इन्होंने स्कूली छात्रों को सड़क दुर्घटना से सुरक्षा के लिए प्रदेश का पहला ओवरब्रिज निर्माण किया जिससे सड़क के दो ओर स्थित स्कूल के दो परिसरों को जोड़ा है। स्कूल के हमेशा अव्वल रहे हैं। विभिन्न गतिविधियों में भूमति स्कूलों के छात्रों ने प्रदेश एवं नेशनल स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है।

इन्हें मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार, पढ़िए इनके आदर्शों की कहानी

रेणुका क्षेत्र के एक छोटे से गांव लवाली में दीपराम के घर जन्मे सतीश शर्मा स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को ही अपना आदर्श मानते हैं। वह आज भी शिक्षा को समर्पित होकर 3 बजे अवकाश के बाद भी बच्चों को शाम 6 से 7 बजे तक पढ़ाते आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट क्लास रूम बनाकर शिक्षा को रुचिकर बनाने का श्रेय भी सतीश शर्मा को ही जाता है।

वाणिज्य प्रवक्ता डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने 20 वर्ष के लंबे करिअर में कई दुर्गम स्कूलों के गरीब एवं असहाय बच्चों को वर्दी, किताबें निशुल्क अपनी जेब खर्च से मुहैया करवाई। डा. रमेश बिलासपुर जिला के हरलोग के निवासी हैं। वे आधा दर्जन से अधिक स्कूलों में सेवाएं देते हुए उन्होंने गरीब छात्रों को पढ़ाई के लिए हर स्तर पर प्रोत्साहित किया है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई के प्रोत्साहित करने का कार्य भी हर स्कूल में करते रहे।

पांगी में जगाई शिक्षा की लौ- वंदना सरोच, सीसे स्कूल कोट तुंगल (मंडी) राजनीतिक शास्त्र की प्रवक्ता अपने 20 साल के कार्यकाल में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र पांगी में सेवाएं दे चुकी हैं। वे सांस्कृतिक गतिविधियों में सात स्कूलों को राज्यस्तर पर अवार्ड भी वह  दिला चुकी है। इन दिनों वह रेड क्रास से जुड़ी हुई हैं।

शारीरिक शिक्षक रणवीर सिंह अपने शिष्यों को तराशने में माहिर हैं। स्कूल समय के दौरान तो वह खेल गतिविधियों के गुर सिखाते ही हैं। लेकिन, सुबह और शाम को भी बच्चों को स्कूल बुलाकर जरूरी टिप्स देते हैं। उनकी मेहनत की बदौलत 50 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं भाग ले चुके हैं, जबकि स्कूल की ज्योति ने राज्य स्तर पर बेस्ट एथलीट का खिताब अपने नाम कर लिया।  उनके मार्गदर्शन में इस स्कूल के बच्चों ने वालीबॉल, हैंडबाल व एथेलेटिक्स में खंड, जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है।

पूनम राणा ने 'आंधियों में जला ‌दिए चिराग'

हेडमास्टर कश्मीर सिंह शिक्षण कार्यों में तो निपुण हैं ही, वह अपने छात्रों को नियमित रूप से योगा अभ्यास भी करवाते हैं। जिससे वह निरोगी रह सकें। कश्मीर सिंह ने स्कूल के छात्रों के साथ मिलकर कैंपस में ही वर्ष 2014 के दौरान छात्रों की मदद से करीब 86 पौधे लगाए और उनकी नियमित देखभाल कर उन्हें सफल भी बनाया है।

बच्चों की मदद को सदैव आगे रहते हैं रामपाल- शिक्षक रामपाल को दूसरी बार राज्य स्तरीय अवार्ड के लिए चुना गया है। उन्हें  एक बार नेशनल अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। शिक्षा क्षेत्र में उम्दा योगदान देने के साथ ही रामपाल स्कूल के गरीब बच्चों की मदद के लिए सदैव आगे रहते हैं। जिसके लिए चाहे उन्हें जेब से खर्च भी क्यों न करना पड़े, वह कभी हिचक महसूस नहीं करते। वहीं शैक्षणिक के अलावा हर गतिविधि  में वह अपनी और छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित करने में भी हमेशा अग्रसर रहे हैं।

चंद्रेश्वर शर्मा, जिला शिक्षा उपनिदेशक(एलिमेंटरी)- सोलन। चंद्रेश्वर शर्मा को शिक्षा के क्षेत्र में उनके बेहतरीन कार्यो को लिए राज्यस्तरीय अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है।  वषर 2015 में उन्हे राष्ट्रीय स्तर पर भी अवार्ड दिया जा चुका है। साल 1986 में चौपाल स्कूल में अध्यापक नियुक्त हुए शर्मा वर्तमान में सोलन में एलिमेंटरी शिक्षा उपनिदेशक सोलन के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे है।

उन्होंने शिक्षकों में लीडरशिप क्वालिटी डेवलपमेंट पर बेहतरीन कार्य किया है। इसके अलावा शिक्षकों को बेहतर पढ़ाने के उम्दार प्रोग्राम तैयार किए हैं। जिनका अनुसरण विभाग द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 2001 में बाक्सिंग के लिए परशुराम अवार्ड और 2012 में स्टेट अवार्ड बेस्ट शिक्षक के लिए चुना गया है।

पूनम राणा ने आंधियों में भी जला दिए चिराग- देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। अगर हौसले बुलंद हों तो आंधियों में भी चिराग जलते हैं। इस कहावत को चरितार्थ करते हुए सीसे स्कूल देहरा जिला कांगड़ा में कार्यरत प्रधानाचार्य पूनम राणा ने राजकीय पुरस्कार प्राप्त किया है। जिदंगी के उतार-चढ़ाव को पार करते हुए पूनम राणा ने अपनी पढ़ाई धर्मशाला से आरंभ करते हुए एमफिल इकोनॉमिक्स में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।

इसके बाद अध्यापन कार्य निजी स्कूल से शुरू करते हुए साल 2008 तक प्रवक्ता इकोनॉमिक्स पद पर कार्यरत रहीं। इसी साल प्रधानाचार्य बनीं। उनके नेतृत्व में स्कूल ने काफी तरक्की की। उनके प्रधानाचार्य रहते स्कूल का नाम साल 2012 में प्राकृतिक आपदा पर बेहतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर राष्ट्रीय स्तर छाया।

केंद्र सरकार की ओर से उन्हें दिल्ली में पुरस्कृत किया गया। उनके प्रयासों से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत झुग्गी झोपड़ियों से एक बेटी की पढ़ाई का बीड़ा उठाया। साथ ही इसी क्षेत्र में बच्चों की पढ़ाई पर भी विशेष बल दिया। परिणामस्वरूप कुछ बच्चों को सरकार की तरफ से लैपटॉप वितरित किए गए। साल 2013 में प्रधानाचार्य पूनम राणा के प्रयासों से स्कूल का

एक विद्यार्थी सोनी टीवी चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति की मुंबई में हुई एक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों में भी स्कूल को बुलंदियों पर पहुंचाया। वर्षों से स्कूल के खाते के बाहर पड़ी जमीन को स्कूल के नाम करवाया। खेल क्रिया कलाओं में पूनम राणा डीएसएसएस की जिला उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं। इनमें उपलब्धियों को देखते हुए प्रदेश सरकार उन्हें पांच सितंबर को सम्मानित करेगी।
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दुनी चंद पांच सालों से दे रहे 100 फीसदी रिजल्ट

दुनी चंद, कन्या सीसे स्कूल सुबाथू में संस्कृत अध्यापक- सुबाथू(सोलन)। कन्‍या स्कूल सुबाथू में तैनात संस्कृत अध्यापक दूनी चंद पिछले पांच सालों से 100 फीसदी रिजल्ट दे रहे हैं। एसएमएसी के विकास कार्यों को हमेशा सिरे चढ़ाया है। अभिभावकों के साथ समन्वय बिठाकर बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने में वह हमेशा आगे रहे हैं।

संस्कृत विषय में पीएचडी कर चुके दूनी चंद का कहना है कि शिक्षा ही मनुष्य की सच्ची मित्र है। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय वह अपने गुरूओं और माता-पिता को देते है। भविष्य में उनकी योजना अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को संस्कृत के माध्यम से संस्कारी बनाना है।

राम कुमार जोशी- राजकीय प्राथमिक पाठशाला मैहतपुर के अध्यापक राम कुमार जोशी को राज्य स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड के  लिए चुना गया है। अध्यापक के साथ-साथ वह सूक्ष्म लेखक भी है। उन्होंने डाक टिकट, पोस्टकार्ड पर हनुमान चालिसा, रमायण के दाहे लिखे है। जिसके चलते वह कई सामाजिक संस्थाओं भी सम्मानित हो चुके है।

जरूरतमंदों का सर्वांगीण विकास संजीव का ध्येय- संजीव कुमार मेहता, प्राइमरी स्कूल बनशैरा (शिमला)
ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंदों बच्चों को शिक्षित करना इनका ध्येय है। गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए मेहता ने अपना जीवन समर्पित कर दिया है। कोटगढ़ की जरोल पंचायत के प्राथमिक स्कूल बनशैरा में कार्यरत एचटी संजीव कुमार मेहता बीते कई वर्षों से गरीब तबके के विद्यार्थियों की हर संभव मदद कर रहे हैं। इतना ही नहीं पांचवीं से पास होकर अगली कक्षाओं में जाने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को सुधारने के लिए भी यह शिक्षक अग्रसर हैं।

जगदीश सूरी- राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रूसलाह में कार्यरत डीपीई. जगदीश सूरी स्टेट अवार्ड के लिए चयनित हुए है। शिक्षक दिवस के मौके पर उनको सरकार की ओर से सम्मानित किया जाएगा। जगदीश सूरी की प्रारम्भिक शिक्षा मिडल स्कूल रूसलाह से हुई । हाई स्कूल की शिक्षा उच्च विद्यालय नेरवा से उसके बाद वर्ष 1988 में सीपीएड पटियाला से किया तथा दस जमा दो प्राईवेट राष्ट्रीय मुक्त विवि से पास की।

पहली बार 25 जून 1992 में माध्यमिक पाठशाला पवान में सहायक शारीरिक  शिक्षक के तौर पर नियुक्त हुए। वर्ष 1997 में बतौर शारीरिक शिक्षक मीडिक घुरला में सेवाएं दी। वर्ष 1998 से 2003 तक नेरवा स्कूल में सेवाएं दी। 1999 से 2000 तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा की डिग्री ली। वर्ष 2004-05 में नागपुर विश्वविद्यालय से एक वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त किया।

जगदीश सूरी ने कब्बडी व वालीबाल में राष्ट् स्तर के खिलाडी रहे है। 23 वर्षों के सेवा काल में 2007 से 2016 तक हिमाचल प्रदेश 19 वर्ष से कम छात्र व छात्राओं के कब्बडी के कोच की भूमिका निभाई। हजारों छात्रों को शिक्षा देने के साथ-साथ

हिमाचल प्रदेश कब्बडी संघ जिला शिमला के सचिव का कार्य भी वर्ष 2012 से किया तथा एमैचयोर कब्बडी फैडरेशन आफ इंण्डिया से क्वालीफाई रेफरी वर्ष 2010 में बने।  उनका जन्म ग्राम रूसलाह में रणू राम व राधू देवी के साधारण परिवार में  पंद्रह अपै्रल 1968को हुआ । उनके बड़े भाई बलबीर सूरी एजी हिमाचल  की टीम में वालीबाल के खिलाडी है।
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