नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल सरकार की रोहतांग में साहसिक खेलों एवं व्यावसायिक गतिविधियों को टूरिस्ट सीजन तक जारी रखने की छूट के आग्रह को ठुकरा दिया है। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने वीरवार को यहां प्रदेश के पर्यावरण के संबंध में अपनाए जा रहे उदासीन रवैये पर सख्त नाराजगी जताई।
ट्रिब्यूनल ने रोहतांग मामले में दिए गए जरूरी दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर सरकार के आला अधिकारियों को आगाह किया कि वह ट्रिब्यूनल की शक्तियों को परखने की गलती न करें। एनजीटी की बेंच ने हिमाचल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान रोहतांग में ट्रिब्यूनल के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों में पर्यावरण सचिव, पर्यटन निदेशक, वन अरण्यपाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव तथा गोविंद वल्लभ पंत हिमाचल स्टडी इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
तीन सप्ताह के भीतर पक्ष रखने को कहा
ट्रिब्यूनल ने इन अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है। इन अधिकारियों को यह भी बताना होगा कि इन्होंने ट्रिब्यूनल के आदेशों के तहत हर 15 दिनों के अंतराल पर ट्रिब्यूनल को स्टेटस रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी? ट्रिब्यूनल ने इन अधिकारियों को कहा था कि रोहतांग को जोड़े जाने वाली गाडि़यों को चेक करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
जनता को मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की रिपोर्ट समय-समय पर ट्रिब्यूनल को सौंपने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने अपने 6 जुलाई के आदेशों में किसी भी फेरबदल करने पर साफ इंकार किया है। इस मामले की आगामी सुनवाई 13 अगस्त को दिल्ली में और 17 सितंबर को शिमला में होगी।
रोहतांग में उड़ रहा प्रतिबंधों का मजाक
रोहतांग क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत करवाने के लिए एनजीटी के गठित पैनल ने वीरवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी। ट्रिब्यूनल ने वरिष्ठ अधिवक्ता जीडी वर्मा, आरएल सूद, अधिवक्ता बलवंत सिंह ठाकुर और देवेंद्र घोष को रिपोर्ट तैयार करने के लिए नियुक्त किया था। इस पैनल ने बताया कि रोहतांग में सभी नियमों की धड़ल्ले से अवहेलना हो रही है। व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने में सरकार असमर्थ है।
सोलंगनाला मनाली और कुल्लू में सफाई व्यवस्था को सुधारने में भी प्रशासन नाकाम रहा है। प्रशासन ने सड़क किनारे लगाए गए ढाबे व ढारे हटा दिए गए हैं। वशिष्ठ के पास बैरियर लगाने में कामयाब रहा है। सोलंगनाला और रोहतांग में स्नो स्कूटर और हॉर्स राइडिंग प्रतिबंध के बावजूद जारी है। मढ़ी में पैराग्लाइडिंग करते हुए पर्यटक पाए गए। पुन: वनीकरण में भी प्रशासन और सरकार नाकाम रही है।
यह हैं छह जुलाई के आदेश
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में छह जुलाई को पारित अपने आदेशों में उपायुक्त कुल्लू और पुलिस अधीक्षक कुल्लू को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि रोहतांग क्षेत्र में स्नो स्कूटर, हार्स राइडिंग, स्नो बाइकिंग और टायर ट्यूब गेम पर पाबंदी होगी। रोहतांग पास में दो पहिया वाहन चलाने की अनुमति नही होगी।
व्यवसायिक गतिविधियों जैसे ढाबा, खोखा, रेहड़ी व अन्य इसी तरह की गतिविधियों पर पाबंदी होगी। रोहतांग पास में बनाए गए ढाबों को तुरंत हटाने के आदेश जारी किए थे। इसके अलावा इन दोनों अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मढी क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियां ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार ही हो। यह सुनिश्चित किया जाए कि बचा हुआ बेकार खाने का सामान इधर-उधर न फेंका जाए।
केंद्रीय विवि के प्रस्तावित निर्माण पर मांगा जवाब
कांगड़ा जिला के देहरा उपमंडल में प्रस्तावित केंद्रीय विवि के निर्माण के लिए 27,648 पेड़ों के प्रस्तावित कटान पर एनजीटी ने कड़ा संज्ञान लिया है। प्रार्थी अनिल कुमार अधिवक्ता की दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि उक्त विवि के निर्माण के लिए 81.71 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया है। इसमें 27648 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। चयनित भूमि पौंग डैम क्षेत्र में है जोकि सेंचुरी एरिया के तहत आता है। राज्य सरकार ने याचिका का जवाब दायर कर उक्त निर्माण को सही माना है।
याचिका में आरोप लगाया है कि प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण को अगर हरी झंडी दी जाती है तो पक्षियों की करीब 150 प्रजातियां और वन्य वनस्पति की करीब 240 प्रजातियां लुप्त हो जाएंगी। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।