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पानी पर निजी अधिकार जताना गलत: एनजीटी

Fri, 07 Sep 2018 01:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) को कसौली में 42 कमरे वाले होटल निर्माण में पानी के प्रयोग के मामले में कड़ी टिप्पणी की है। निगम का कहना था कि वह निर्माण कार्य में खुद के पानी का प्रयोग करेंगे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पानी का प्राकृतिक स्रोत कभी निजी नहीं हो सकता और न ही इस पर अपना हक जताया जा सकता है।

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दरअसल निगम का कहना था कि वह न तो स्थानीय प्राधिकरण से जल लेंगे और न ही भूजल की निकासी करेंगे। पीठ ने उन उन सभी होटल मालिकों को फटकार लगाई है जो संचालन की अनुमति इस आधार पर चाहते हैं कि उन्होंने जुर्माने की राशि भर दी है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी में कहा कि जिन होटलों पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया वह उनके जरिए पूर्व में पर्यावरण को पहुंचाई गई क्षति के लिए है।

जुर्माना भर देने से वे पाक-साफ नहीं हो जाएंगे। जलसंकट से जूझते कसौली में सिर्फ इन आधारों और दलीलों पर निर्माण के लिए मंजूरी नहीं दी जा सकती। पीठ ने कहा कि वे निर्माण परियोजना के दस्तावेजों, दावों की हकीकत और पूर्व आदेशों के अनुपालन की स्थिति देखने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। साथ ही आदेश में न सिर्फ एचटीपीडीसी का प्रस्तावित होटल शामिल होगा बल्कि वे होटल भी शामिल होंगे जिन्हें पूर्व में अवैध निर्माण और अतिक्रमण का दोषी पाया गया। 
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उच्च भूकंप वाला क्षेत्र, हल्का कंपन भी बना देगा मलबा
कसौली के होटलों के मामले में नियुक्त किए गए न्यायमित्र ने एनजीटी से कहा है कि कसौली उच्च भूंकप वाला क्षेत्र है। ऐसे में एक हल्का कंपन भी शहर को मलबे में तब्दील कर सकता है। कसौली में और निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। यदि हो भी तो बहुत ही सोच-समझ कर होना चाहिए। कसौली में न सिर्फ जलसंकट है बल्कि सीवेज और ठोस कचरे का कोई भी उचित प्रबंध नहीं है। पर्यावरण मंत्रालय और सीपीसीबी की रिपोर्ट भी अपनी रिपोर्ट में जल उपलब्धता को बढ़ाने और सीवेज व ठोस कचरा प्रबंधन की सिफारिश की है।

पर्यावरण मंत्रालय से निर्माण कार्य को मंजूरी नहीं
इससे पहले गैर सरकारी संस्था स्पोक की तरफ से पेश अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जरिए दाखिल रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जब तक सीवेज और जलसंकट को दूर नहीं कर लिया जाता है तब तक कसौली में किसी तरह के निर्माण को अनुमति नहीं दिया जाना चाहिए। अधिवक्ता ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बिना अध्ययन किए और 10 दिनों के भीतर दी गई निर्माण और संचालन मंजूरियों को लेकर भी सवाल उठाया है।

पर्यटकों का दबाव, पार्किंग की मांग 
कसौली छावनी परिषद ने कहा है कि वे परिषद क्षेत्र में किसी तरह के निर्माण को मंजूरी नहीं देंगे। हालांकि, शनिवार और रविवार को पर्यटकों का दबाव इस तरह होता है कि उन्हें अपने परिसर में भी वाहनों को खड़ा कराना पड़ता है। सड़कों की चौड़ाई कम होने से ऊंचाई से लेकर नीचे तक सड़क के दोनों ओर वाहनों का मेला लग जाता है जहां पैदल चलना मुश्किल होता है। ऐसे में जरूरी है कि कसौली में कम से कम तीन मंजिला पार्किंग स्थल बनाया जाए। इस पर याची के अधिवक्ता और न्यायमित्र ने अपने सुझाव में कहा कि कसौली के बाहर करीब 5 किलोमीटर पहले ही पार्किंग बनाया जाना चाहिए। कसौली के भीतर किसी तरह का पार्किंग स्थल नहीं बनना चाहिए। 

एनजीटी संतुष्ट नहीं
एनजीटी ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वे प्राधिकरणों के जवाब और 2017 से जिन होटलों पर अवैध निर्माण का मामला चल रहा है उनके जवाब से पूरी संतुष्ट नहीं है। न ही एचपीटीडीसी के इस मत से ही संतुष्ट हैं कि उसके निर्माण से किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा और 42 रूम वाले होटल के निर्माण के लिए वर्षा जल संचयन से ही काम चलाएगा।

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