अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक राजधानी शिमला के राम मंदिर हॉल में हुई। हिमाचल शिक्षक महासंघ की ओर से आयोजित त्रिदिवसीय बैठक के दूसरे दिन का आगाज पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने किया। बैठक में सरकारी नौकरी वाले कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में ही अनिवार्य तौर पर पढ़ाने की वकालत की गई।
महासंघ ने प्राथमिक कक्षाओं में मातृ भाषा में ही छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने पर जोर दिया। अध्यक्षीय भाषण में नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
कहा कि हमने अपने कार्यकाल में महासंघ द्वारा प्रस्तुत सात सूत्री मांगपत्र को अक्षरश: तथा हिमाचल प्रदेश को शिक्षा हब बनाने की ओर बहुत से कदम उठाए थे। इसी क्रम में हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए ग्यारह विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पालक अधिकारी अनिरुद्ध देशपांडे ने वर्तमान शिक्षा नीति पर प्राथमिक शिक्षा को मातृ भाषा में ही देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों को अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में शिक्षा देनी चाहिए। इस व्यवस्था को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
मीटिंग ये रहे मौजूद
बैठक में भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल प्रसाद अग्रवाल, महामंत्री जेपी सिंघल, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष रजनीश चौधरी, संगठन मंत्री पवन मिश्रा, महामंत्री जगवीर चंदेल, शिमला के भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज, सतलुज जल विद्युत परियोजना के निदेशक गणेश दत्त, पूर्व राज्य सभा सांसद विमला कश्यप, भाजपा जिला अध्यक्ष संजय सूद सहित देश के कई विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।