गुड़िया गैंगरेप हत्याकांड की अपने स्तर पर जांच करने के लिए आईं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू ने वीरभद्र सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कहा कि मामले में सरकार के दखल पर पुलिस ने जांच में जिस तरह बदलाव किए, उससे पूरी जांच शक के दायरे में है।
उन्होंने सीएम के फेसबुक पेज पर चार आरोपियों के फोटो वायरल होने और फिर हटाने के बारे में पूछा कि आखिर इस मामले में क्या कार्रवाई हुई। कहा कि शिक्षा विभाग ने बड़ी लापरवाही बरतते हुए गुडि़या के असली नाम को उजागर करते हुए स्कूल को अपग्रेड करने की अधिसूचना तक जारी कर दी।
यह कानूनी अपराध है, लेकिन न तो मुख्यमंत्री इसको लेकर गंभीर है और न ही उनके सलाहकार और अधिकारी। पूछा कि इस मामले में सरकार ने क्या कार्रवाई की?
उन्होंने सीएम की पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को भी निशाने पर लिया। पूछा कि आखिर क्या वजह थी कि पीडि़त परिवार पर वह सीबीआई जांच कराने के बजाय पुलिस जांच कराने का दबाव बना रही थीं।
उन्होंने पुलिस से गुडि़या के परिवार को सुरक्षा देने के लिए कहा है। कहा कि अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद वह इसे सीबीआई के साथ भी साझा करेंगी। बीते शुक्रवार को साहू गुडि़या तथा मृतक सूरज के परिजनों से भी मिलीं। शनिवार को एडीजीपी कानून व्यवस्था से मुलाकात की। उन्होंने पुलिस के रवैये को लेकर वर्मा को जमकर फटकार लगाई।
एडीजी को नहीं पता डीजीपी कहां हैं?
साहू ने कहा कि मामले की जानकारी लेने के लिए जब डीजीपी को बुलाया तो एडीजीपी पहुंचे। उनसे पूछा कि डीजीपी कहां हैं तो वह बता तक नहीं पाए। इतने हाई प्रोफाइल मामले के आरोपियों नाम तक एडीजी को नहीं पता थे।
पुलिस के पास नहीं अनसुलझे सवालों का जवाब
साहू ने गुडि़या प्रकरण पर कहा कि कई ऐसे सवाल हैं, जो अनसुलझे हैं। पुलिस के पास भी उनका जवाब नहीं है। लगता है कि यहां तो दाल ही काली है। पुलिस अपनी किसी थ्योरी को प्रूफ करने के लिए ठोस जवाब नहीं दे पाई।
कहा कि लाश साफ सुथरी थी, जिस जगह पड़ी मिली, वहां कोई संघर्ष के निशान नहीं थे। आबादी के नजदीक ही शव मिला, ऐसे में किसी ने शोर क्यों नहीं सुना। साथ ही गुडि़या की एक जुराब जो आशीष के घर से बरामद होने की बात सामने आई थी, वह अचानक गायब कहां हो गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल
साहू ने गुडि़या के पोस्टमार्टम पर भी सवाल उठाए। कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्ची की मौत से दो घंटे पहले चावल खाए हैं। रिपोर्ट में कहा है कि मौत 4 जुलाई शाम को 4 से 5 बजे के बीच हुई है और लाश 6 जुलाई की सुबह मिली है।
उसका पोस्टमार्टम 7 को हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है इतने दिन तक चावल पेट में वैसे का वैसे नहीं रह सकता। गुडि़या के गले में ताजा निशान थे। यदि इसकी मौत 4 को हुई है तो निशान ताजा न रहते।
गुडि़या के पिता ने कहा कि उसकी टांग और बाजू टूटी थी और गले पर दबाने के ताजा निशान थे। इसके अलावा जंगल में इतने समय तक क्या कोई जानवर या कुत्ता तक भी नहीं गया। उस पर कोई मक्खी तक कैसे नहीं लगी। उनका कहना था कि इससे कई सवाल खड़े होते हैं। अब सीबीआई इन सवाल के जवाब तलाशेगी।
ममता ने जो कहा, वह चौंकाने वाला
साहू ने कहा कि वह सूरज की पत्नी से भी मिली हैं। पत्नी ममता ने जो बताया है वह चौंकाने वाला है। पुलिस पूछताछ के लिए सूरज को ले गई थी। रात को जब वह वापस आया तो उसका बुरा हाल था। उसे इतनी बुरी तरह मारा पीटा था कि पूरा शरीर सूजा हुआ था।
ममता ने कहा कि पुलिस यह कहकर ले गई कि कुछ पूछताछ करनी है। कहा कि सूरज ने उन्हें बताया था कि पुलिस वालों ने शराब पीकर उन्हें पीटा है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस कस्टडी में कैसे राजू ने उसे मारा।
उस वक्त पुलिस क्या कर रही थी। साहू बोलीं - ममता ने कहा कि वह और उनका पति 4 से 6 जुलाई तक दिहाड़ी पर थे। राजू भी काम पर था। वह 5 जुलाई को अपनी मां के इलाज को आईजीएमसी आया था। यह आईजीएमसी से पता किया जा सकता है। यहां की सीसीटीवी फुटेज भी बता सकती है।
चार साल से नहीं भेजी मामलों की स्टेटस रिपोर्ट
साहू ने कहा कि हर साल होने वाली घटनाओं की जानकारी और स्टेटस रिपोर्ट के लिए आयोग प्रदेश पुलिस को पत्र लिखता है। साल 2013 से अब तक पुलिस ने एक भी मामले की एक्शन टेकन रिपोर्ट तक नहीं भेजी है।
पुलिस को सिर्फ शिमला जिले के 16 मामलों की एक सूची भेजी है, जो अभी तक लंबित हैं। निर्देश दिए कि वह जल्द मामले की एटीआर आयोग को उपलब्ध कराएं।