कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने ई 20 यानी 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में दावा किया कि सरकार बिना ठोस परीक्षण के जनता के वाहनों को प्रयोगशाला में बदल रही है, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान हो रहा है। राठौर ने कहा कि 30 जून को सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने बताया था कि ई20 पेट्रोल का अभी सिर्फ प्रयोग चल रहा है और इसे पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। राठौर ने सवाल उठाया कि यदि यह सिर्फ एक प्रयोग है, तो इसे पूरे देश पर क्यों थोपा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ई 20 पेट्रोल गाड़ियों के इंजनों के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है, जिससे इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज में गिरावट आ रही है। उन्होंने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा कि इस ईंधन से गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है।
राठौर ने सरकार से पूछा कि क्या वह इस प्रयोग से प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने की मंशा है, जिससे तेल कंपनियों को वित्त वर्ष 2024-25 में 80,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 1,17,142 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है। राठौर ने कहा कि ई 20 पेट्रोल के कारण जनता में आक्रोश है और कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देश भूटान ने भी इस मिश्रित तेल को लेने से इन्कार कर दिया है। पुरानी गाड़ियां, दोपहिया वाहन और कृषि उपकरण इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं, जिससे उन्हें भारी क्षति हो रही है। राठौर ने मांग की कि जब तक इस प्रयोग के पारदर्शी परिणाम सामने नहीं आते, तब तक ई 20 पेट्रोल पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने जनता को शुद्ध पेट्रोल और मिश्रित पेट्रोल में से चुनने का विकल्प देने की भी मांग की। राठौर ने सेब सीजन शुरू होने का जिक्र करते हुए सरकार से सड़कों को दुरुस्त रखने के लिए उचित प्रबंध करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम को देखते हुए यह जरूरी है ताकि बागवानों का सेब बिना किसी बाधा के समय पर मंडियों तक पहुंच सके। राठौर ने बताया कि उन्होंने शिमला के डिप्टी कमिश्नर से भी बात की है, जिन्होंने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है।