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मुस्लिम लड़कियां भी ले रहीं हिंदू धर्म शास्त्रों की शिक्षा, जा रहीं मंदिर

Tue, 05 Mar 2019 02:26 PM IST
ashok chauhan सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
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देवभूमि हिमाचल में मुस्लिम समुदाय की नई पीढ़ी धर्म-जाति की बेड़ियों को तोड़ एक मिसाल पेश कर रही है। मुस्लिम लड़कियां और लड़के वेदों, हिंदू धर्म-शास्त्रों की शिक्षा ले रहे हैं। कई लड़कियां और  उनके परिवार रोजाना मंदिर भी जाते हैं।

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कुरान के अलावा गीता में भी उनकी वैसी ही रुचि हैं। उनके परिवारों को भी कोई आपत्ति नहीं है। वे खुद चाहते हैं कि उनके बच्चे संस्कृत में अपना करिअर बनाएं। 

कांगड़ा जिला के बलाहर (देहरा) स्थित संस्कृत डीम्ड यूनिवर्सिटी में मुस्लिम समुदाय की करीब 11 लड़कियां शास्त्री, आचार्य और बीएड की पढ़ाई कर रही हैं। यहां पर दो मुस्लिम लड़के भी शास्त्री की पढ़ाई कर रहे हैं।
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देश के 13 राष्ट्रीय संस्कृत संस्थानों में शुमार इस संस्थान में करीब 800 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यहां संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों में 70 फीसदी संख्या लड़कियों की है।

मुस्लिम छात्रा बोलीं - हम तो जाते हैं हिंदू मंदिर 

शास्त्री में दर्शन शास्त्र, साहित्य, वेद, ज्योतिष और व्याकरण की पढ़ाई होती है। संस्कृत विवि के प्राचार्य प्रो. लक्ष्मी निवास पांडे ने बताया कि देश भर में स्थापित संस्कृत संस्थान राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे संस्थान में भी हिंदू-मुस्लिम छात्र प्यार भाव से संस्कृत पढ़ रहे हैं।

हर काम से पहले होता है वैदिक मंत्रोच्चारण
बलाहर स्थित संस्कृत संस्थान में कोई भी कार्य करने से पहले वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है। सुबह सूर्य नमस्कार होता है। हिंदू धर्म के मंत्रों से परिसर गूंजता रहता है। मुस्लिम लड़कियां संस्थान के इन सभी नियमों का निर्वहन करती हैं।  

संस्कृत विवि में शास्त्री संकाय की प्रथम वर्ष की छात्रा मीना बीबी ने बताया कि उसके परिजनों ने ही उसे संस्कृत पढ़ने के लिए भेजा है ताकि वह शिक्षक बनकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके। मीना ऊना की रहने वाली हैं।
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मौलवी पिता ने खुद बेटी को भेजा संस्कृत पढ़ने 

उन्होंने कहा कि हिंदू - मुस्लिम के नाम पर लड़ने वाले लोगों पर हमें तरस आता है। हम तो हिंदू मंदिर में जाकर पूजा भी करते हैं। धर्म के नाम पर कोई भेदभाव नहीं है।  
     
प्रथम वर्ष की छात्रा रुकसाना बेगम ने बताया कि मैं हिंदू ग्रंथों के बारे में जानना चाहती थी, इसलिए शास्त्री कर रही हूं। हमें एक दूसरे के धर्म व रीति रिवाज अपनाने चाहिए।

धर्म और जातपात में नहीं फंसना चाहिए। मेरे पिता मौलवी हैं और उन्होंने ही मुझे संस्कृत पढ़ने के लिए भेजा है। हम तो हिंदू मंदिर में नियमित रूप से जाकर माथा टेकते हैं। 
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