कस्तूरी मृग घायल अवस्था में मिला।
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हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में रापे गांव के समीप खेत में कस्तूरी मृग घायल अवस्था में मिला। जोबरंग पंचायत के पूर्व प्रधान सोमदेव योकी के माध्यम से लोगों ने वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। घायल कस्तूरी मृग का प्राथमिक उपचार करवाया। हालांकि, कुछ समय बाद उसने दम तोड़ दिया। कस्तूरी मृग की मौत किस वजह से हुई, यह अभी पता नहीं चला है।
विभागीय अधिकारी मान रहे हैं कि घायल अवस्था में मिला कस्तूरी मृग स्नो लैपर्ड के चंगुल से छूटकर रिहायशी इलाके में पहुंचा। जैसे ही कस्तूरी मृग रिहायशी इलाके की ओर दौड़ा तो तीन-चार कुत्ते भी पीछे दौड़ पड़े। रापे गांव के एक बच्चे ने इसकी जानकारी पिता को दी। लोगों ने उसे कुत्तों से बचाकर विभाग को सूचित किया। कस्तूरी मृग 2,000 से 5,000 मीटर ऊंचे हिम शिखरों में पाया जाने वाला बेशकीमती जीव है।
इसे हिमालयन मस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। कस्तूरी मृग अपनी सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि नाभी में पाए जाने वाली कस्तूरी के लिए प्रसिद्ध है। पट्टन वन परिक्षेत्र अधिकारी भूपेंद्र पाल ने कहा कि पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सक से कस्तूरी मृग का उपचार करवाया गया। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। कहा कि लाहौल घाटी में शिकार पर पाबंदी है। ऐसे में यहां वन्य जीवों से कोई छेड़छाड़ नहीं करता है।