इस आडिट रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की चार अक्तूबर 2016 की अधिसूचना का हवाला दिया गया, जिसके अनुसार स्पष्ट है कि विवाह के पंजीकरण की फीस 200 रुपये प्रति विवाह के अनुसार ली जाएगी। अगर निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं किया गया तो यह फीस दोगुना यानी 400 रुपये ली जाएगी। यानी 200 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
18 विवाहितों ने देरी से पंजीकरण करवाया तो इनमें से किसी से कोई भी लेट फीस नहीं ली गई तो किसी से पांच रुपये अतिरिक्त वसूले गए तो किसी से 55 रुपये वसूले गए। सभी 48 शादियों के केवल 480 रुपये ही वसूले गए, जबकि 9600 रुपये वसूले जाने थे। विलंब शुल्क 3600 रुपये का वसूला जाना था। इस तरह से सरकारी कोष को 12,720 रुपये का चूना लगाया गया। इस तरह की मनमर्जी की वसूली किन नियमों में की गई, इस बारे में नगर पंचायत की ओर लेखा परीक्षा के दौरान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।