कोरोना वायरस और ब्लैक फंगस के बीच अब हिमाचल प्रदेश के बच्चों को मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम होने लगा है। आईजीएमसी शिमला में अब तक करीब 18 बच्चों को भर्ती किया गया। उपचार के बाद अधिकांश बच्चे ठीक होने के बाद घर भेज दिए गए हैं। अब आईजीएमसी में ऐसे दो बच्चे ही भर्ती हैं। यह सिंड्रोम छोटे बच्चों में फैल रहा है। 14 से 15 साल के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। नया संक्रमण अब पीडियाट्रिक्स विभाग के चिकित्सकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इसकी चपेट में वही बच्चे आ रहे हैं, जो पहले कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। अभिभावकों ने इनका उपचार नहीं करवाया है। सभी बच्चे कोरोना संक्रमण होने के चार से छह सप्ताह बाद बच्चे इस बीमारी से संक्रमित हो रहे हैं। यह बीमारी बच्चे के संक्रमित होने के बाद उनके हृदय रोग, गुर्दे और लीवर को भी प्रभावित कर सकती है।
उधर, स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम उन्हीं बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिन्हें पहले भी कोविड हो चुका है। आईजीएमसी में दो बच्चे भर्ती हैं। बच्चे ठीक होकर घर जा रहे हैं।
क्या है मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम
शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम यानी MIS-C होने का खतरा उन बच्चों में होता है, जो कोरोना वायरस महामारी से उबरे होते हैं और कई सप्ताह बाद इसे इन बच्चों में देखा गया है। हालांकि, ये सिंड्रोम रेयर है और ये तब होता है जब कोरोना का संक्रमण खत्म हो जाता है और कोरोना के खिलाफ एक बच्चे के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो जाती हैं जो बच्चे के शरीर के आंतरिक अंगों में एलर्जी की प्रतिक्रिया देना शुरु कर देते हैं।
डॉक्टरों का मानना है कि वो नहीं कह सकते कि मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कितना खतरनाक है, लेकिन वो ये जरूर कह सकते हैं कि संक्रमण निश्चित रूप से बच्चों को बुरी तरह से प्रभावित करता है। यही नहीं ये मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम बच्चों के हृदय, गुर्दे और लीवर को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।