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शत्रु, यशवंत, शौरी का महागठबंधन रैली में जाना दुखदायी: शांता कुमार

Wed, 23 Jan 2019 12:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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सत्रह किताबें लिखने वाले और अटल-आडवाणी के खासमखास रहे राजनीति के चाणक्य शांता कुमार इस बार लोकसभा चुनाव को मोदी सरकार के लिए चुनौती मानते हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि मोदी मैजिक जनता में बरकरार है।

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शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी के ममता की महागठबंधन रैली में जाने से दुखी शांता का कहना है कि इन तीनों नेताओं को भाजपा से अलग नहीं होना चाहिए। पेश हैं संवाददाता सुनील चड्ढा से सांसद शांता कुमार के साथ हुई विशेष बातचीत के प्रमुख अंश। 

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कोलकाता में महागठबंधन रैली पर ये कहा

प्रश्न : कोलकाता में महागठबंधन रैली के लिए क्या आपको भी मिला था न्योता? 
उत्तर : महागठबंधन रैली में शत्रुघ्न सिन्हा, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी तीनों नेताओं के जाने से दुखी हूं। ये नेता हमसे अलग नहीं होने चाहिएं। शत्रु तो मेरे व्यक्तिगत मित्र हैं। पिछले दिनों जब मैं शत्रु से मिला था तो मैंने उनसे कहा था कि आप अगर पार्टी के साथ रहते तो आपको भी फायदा होता और हमें भी। जब मोदी सरकार बनी तो इनमें से कुछ को लगता था कि हम बड़े योग्य हैं। इस योग्यता के आधार पर हमारा लाभ उठाया जाना चाहिए। हालांकि, पार्टी को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता है। रैली के लिए मुझे न्योता आने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। 

प्रश्न : आरोप है बतौर सांसद आपने सीमेंट उद्योग, ब्रॉडगेज रेल लाइन और केंद्रीय विवि के वादे नहीं निभाए, क्या कहेंगे?
उत्तर : मैंने अधिकतर वादे निभाने के अथक प्रयास किए। फोरलेन, केंद्रीय विवि का काम शुरू हो रहा है। चंबा में सीमेंट प्लांट के लिए बिड कर दी, लेकिन वाइबिलिटी के चलते कंपनियां आगे नहीं आ रहीं। हम प्रयास कर रहे हैं।

क्या आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे शांता?

प्रश्न : आरोप है कि जयराम सरकार की प्रशासन पर पकड़ नहीं, कैसे आंकते हैं सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल?
उत्तर : जयराम सरकार बढ़िया काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी की तरह जयराम भी छुट्टी नहीं करते। जयराम ईमानदार और गांव से उठे व्यक्ति हैं। उन्होंने हिमाचल में जनमंच जैसी कई अच्छी योजनाएं शुरू की हैं। विपक्ष की टकराव की राजनीति अच्छी नहीं है।  
प्रश्न: जयराम सरकार की तरह आप धूमल सरकार की तारीफ क्यों नहीं करते थे?
उत्तर : ऐसी कोई बात नहीं है। मैं तो सहयोग में विश्वास रखता हूूं। जो जितना सहयोग लेता था, उसे उतना सहयोग देते थे। मेरा पार्टी और नेताओं के प्रति समान व्यवहार रहा है।
प्रश्न : क्या आगामी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे?
उत्तर : मैंने हाईकमान को साफ कहा है कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता। नए चेहरे को मौका मिले, लेकिन पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होगा।  

10 फीसदी आरक्षण का फैसले पर ये कहा

प्रश्न : सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण का फैसला चुनावी स्टंट तो नहीं?
उत्तर : मैंने तो 1978 में ही आरक्षण तय कर दिया था। अंत्योदय योजना में 67 फीसदी एससी-एसटी और बाकी सवर्ण जाति के लिए थे। सवर्ण जाति के लिए 10 फीसदी आरक्षण के फैसले का लाभ चुनाव में पार्टी को जरूर होगा। अगर निर्णय पहले किया होता तो मध्य प्रदेश समेत तीन राज्य हम नहीं हारते।  
प्रश्न : हिंदुत्व और गाय पर राजनीति सही है?
उत्तर : गाय और धर्म के नाम पर हिंसा पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। लेकिन गाय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
प्रश्न : चुनाव नजदीक आते ही राम मंदिर को राजनीतिक हथियार क्यों बनाती है भाजपा?
उत्तर : भाजपा के लिए राम मंदिर चुनाव नहीं आस्था का विषय है। इसमें राजनीति का प्रश्न नहीं है। पीएम ने इस पर अपनी बात स्पष्ट कर दी है। यह दुर्भाग्य का विषय है कि आज तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो सका।
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सबका साथ सबका विकास बहुत बढ़िया, लेकिन है अधूरा 

शांता ने कहा कि मुझे जो बात ठीक लगती है वह मैं कहता हूं। मैंने तो पीएम को भी पत्र लिखकर कहा है कि सबका साथ सबका विकास बहुत बढ़िया है, लेकिन यह अधूरा है। गरीब का विकास सबसे पहले और सबसे ज्यादा होना चाहिए। पीएम को कहा था विकास तो बहुत हुआ लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक आज भी देश के 20 करोड़ लोग भूखे सो रहे हैं।

20 करोड़ गरीबों के लिए अंत्योदय मंत्रालय खुलें
मैंने प्रधानमंत्री को 20 करोड़ गरीब लोगों के लिए अंत्योदय मंत्रालय खोलने का सुझाव दिया है। पीएम इस पर विचार कर रहे हैं। इसका लक्ष्य 20 करोड़ लोगों को भुखमरी के दायरे से बाहर लाना होगा। जनसंख्या घटाने को लेकर भी मैंने पीएम से नीति बनाने की मांग की है।
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