पहाड़ों से प्यार है, ये मुझे मरने नहीं देंगे। हाल ही में नेपाल की अन्नपूर्णा पहाड़ी को फतह कर लौटीं पर्वतारोही बलजीत कौर ने यह बात कही। मौत को मात देने वाली पर्वतारोही बलजीत ने कहा कि उन्होंने चल बग्गे शेरनी का नारा देकर अन्नपूर्णा पहाड़ी से उतरना शुरू किया था। गिरने के बाद वह दो घंटे तक बेहोश रही थीं। उनके साथ गए दो साथी भी छोड़कर चले गए थे। अन्नपूर्णा चोटी पर चढ़ाई आसान नहीं थी। सोलन के ममलीग की बलजीत कौर वीरवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्यातिथि थीं।
उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बनाने के बारे में कभी नहीं सोचा था। दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। रात को 12 बजे तक जिम में वर्कआउट करती थीं और सुबह चार बजे उठकर योग करती थीं। उन्होंने बताया कि पहाड़ पर चढ़ाई के दौरान माइनस 45 डिग्री तापमान में कड़ाके की ठंड के बीच गुजरना पड़ता है। सफर के दौरान कई बार बर्फीला तूफान भी आया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अखबार पढ़ने के बाद शुरू हुआ सफर, योग-डांस सिखाकर निकाला खर्च
बलजीत कौर ने बताया कि एक अखबार में छपी खबर पढ़ने के बाद उनके सफर की शुरुआत हुई। कहा कि राजस्थान की बेटी के एवरेस्ट फतह करने वाली खबर उन्होंने अखबार में पढ़ी। इसके बाद ही सोचा कि मैं भी यह कर सकती हूं। इसके बाद निरंतर आगे बढ़ती रही। सपने को पूरा करने के लिए योग, डांस सिखाकर खर्च निकाला। आर्थिक हालात भी ठीक नहीं थी। जब ट्रेनिंग के लिए गुरुग्राम गई थीं तो सिर्फ 300 रुपये में तीन दिन गुजारा करना पड़ा था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। परिवार वालों ने भी पूरा साथ दिया।
बेटी के वापस आने से माता-पिता खुश
हिमाचल का नाम सुनकर आदर की भावना आती है, क्योंकि हिमाचल का नाम देवभूमि है। उन्होंने कहा कि घर छोटा है तो क्या हुआ, सपने बड़े देखने चाहिए। अपने माता-पिता के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उनको रिकॉर्ड से ज्यादा उनकी बेटी के वापस आने की खुशी है।