राजधानी से सटी मल्याणा पंचायत के शकराला क्षेत्र में सैकड़ों लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। यहां रास्तों और घरों में लगातार दरारें बढ़ती जा रही हैं। इससे स्थानीय लोग हर समय अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि पूरा क्षेत्र लगातार क्यों धंस रहा है। हर बार घरों में दरारें आने पर लोग मरम्मत करवाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से दरारें उभर आती हैं। यहां करीब 150 से अधिक भवन हैं और अधिकांश में दरारें पड़ चुकी हैं। बरसात के मौसम में लोगों की चिंता और बढ़ जाती है। जमीन धंसने से कुछ समय पहले यहां एक मकान गिरने की कगार पर पहुंच गया था। इसके बाद भवन को गिराकर दोबारा बनाया गया लेकिन अब नए भवन में चारों ओर दरारें पड़ गई हैं। घर तक जाने वाली सीढ़ियां भी एक ओर झुक गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरी पहाड़ी में दशकों से लगातार धंसाव हो रहा है। पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में नेशनल हाईवे और निचले हिस्से में फोरलेन निर्माण के लिए की कटिंग के कारण खतरा बढ़ गया है। इस आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने करीब आठ लाख रुपये खर्च कर भवनों की छतों और बाथरूम से निकलने वाले पानी की उचित निकासी के लिए पाइप बिछाने का काम शुरू किया है। लोगों का मानना है कि जल निकासी की समस्या भी धंसाव का एक कारण हो सकती है। स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों से क्षेत्र का विस्तृत सर्वे करवाकर धंसाव के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
पानी निकासी पर खर्च किए 8 लाख
जमीन धंसने से लोग चिंता में हैं। लोगों ने आठ लाख रुपये खर्च कर पानी की उचित निकासी के लिए पाइप बिछाने का काम शुरू किया है। प्रदेश सरकार को धंसाव के कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों से सर्वे करवाना चाहिए।
-एमएस राव, शकराला निवासी
हर समय रहता है खतरा
शकराला क्षेत्र में लगातार हो रहे धंसाव से लोग परेशान हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई से घर बनाए हैं। दरारें आने के कारण कई बार मरम्मत करवा चुके हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर दरारें पड़ जाती हैं। प्रदेश सरकार को धंसाव के कारणों का पता लगाकर स्थायी समाधान करना चाहिए, ताकि सैकड़ों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -
सीमा वर्मा, निवासी शकराला