आंगनबाड़ी से दो दिन की छुट्टी लेकर मायके जाने वाली थी गुलशन, बेटे को भी किया था तैयार दोपहर को हुई फोन पर बात, मायके लाने के लिए भाई को भेजने की कही थी बात
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। गुलशन की निर्मम हत्या के मामले से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। जिस बेटी का मां शाम को घर आने का इंतजार कर रही थी, रात को उन्हें उसकी मौत की खबर मिली। इससे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
बताया जा रहा है कि गुलशन ने मायके जाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र से दो दिन की छुट्टी ली थी। उसने चार साल के बेटे सारांश को भी ननिहाल जाने के लिए तैयार किया था। दोपहर 12:30 बजे के करीब गुलशन की मां के साथ फोन पर बात हुई। इसमें उसने मायके आने की बात कही थी। मां ने भी उसे लाने के लिए उसके भाई को भेजने की बात कही थी। इस बीच आरोपी पति ने उसकी निर्मम हत्या कर दी। घटना के समय उनका चार साल का बेटा भी घर पर ही था।
गांव के लोगों ने बताया कि दोपहर 2:00 बजे के करीब उन्होंने गुलशन को घर आते हुए देखा था। इसके बाद उसे घर से बाहर निकलते नहीं देखा। गुलशन का घर गांव के बीचोबीच है। ऐसे में गांव के लोग सकते हैं कि यहां इतनी बड़ी घटना हो गई और किसी को कानोकान खबर तक नहीं लगी। पंचायत प्रधान अंजना रोहाल ने बताया कि उन्हें बुधवार रात सूचना मिली कि गुलशन लापता हो गई है। इसके बाद वे मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि दोपहर तेज धूप होने के कारण लोग आमतौर पर बाहर नहीं निकलते हैं। इसके साथ ही घर पास जेसीबी से खोदाई का काम भी चल रहा था। लोगों का मानना है कि शायद इसी शोर की वजह से इस बारे में किसी को भनक नहीं लगी।
पंचायत उपप्रधान कपिल ने बताया कि तोताराम ने लोगों से कम बातचीत करता था और अपने काम से ही काम रखता था। इस हादसे से सभी लोग सहमे हुए हैं।
मासूम सारांश बोला, मम्मा नानी के घर चला गई, मुझे भी जाना है
गुलशन की निर्मम हत्या से जहां चार साल के बच्चे सारांश के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया वहीं पिता सलाखों के पीछे पहुंच गया है। मां ने बेटे को तैयार करते हुए बताया था कि हम नानी के घर जा रहे हैं और उसे तैयार भी किया था। अब मासूम इस पूरी घटना से अनजान है। उसने कहा कि उसकी मां नानी के घर चला गई है और उसे भी जाना है। सारांश अभी गुलशन की चाची के घर पर है। बताया जा रहा है कि गुलशन का शिमला में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया है। रिश्तेदार मीरा ने बताया कि गुलशन बेटे को कभी भी अपने आप से अलग नहीं करती थी। शाम को जब गुलशन की मां का फोन आने पर वह घर पहुंचे तो बाहर गड्ढे से धुआं उठ रहा था। घर का दरवाजा खुला था और लाइटें भी जली हुई थीं। जब आरोपी ने बताया कि वह ड्यूटी चला गया है और बेटे को साथ ले गया है तो उन्हें किसी अनहोनी का शक हुआ। गुलशन बेटे को कभी भी अकेला नहीं छोड़ती थी। खुद शोघी में स्कूल लेकर जाती थी और वापस लाती थी।