फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mother’s Day 2023: हादसे में पति के दिव्यांग होने पर बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सुमन ने लांघी दहलीज

Mon, 15 May 2023 01:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुभाष अग्निहोत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंबा

सार

सुमन अब तक 30 युवतियों को अपने स्तर पर निशुल्क प्रशिक्षित कर चुकी हैं। साथ ही 300 से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ कर अपने पांव पर खड़ी करने की सीख दे चुकी हूं।
विज्ञापन
सुमन - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पति रविंद्र सोहन लाल वर्ष 1999 में मकान की छत से गिर कर चोटिल हो गए। इसके बाद वे चलने- फिरने में पूरी तरह से असमर्थ हो गए और बिस्तर से अकेले नहीं उठ तक पाते थे। उनके उपचार का क्रम कई वर्षो तक चलता रहा। वर्ष 2015 में उनकी मृत्यु के बाद दो बच्चों समेत सास-ससुर की जिम्मेदारी उन पर आन पड़ी। ऐसे में बच्चों को बेहतरीन तालीम दिलवाने और परिवार का भरण पोषण करने के लिए घर की दहलीज लांघ कर काम की तलाश में यहां-वहां भटकना पड़ा।

विज्ञापन


यह कहना है चंबा निवासी सुमन (सुमित्रा) का। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई जगहों पर काम मांगने के लिए भी गई, लेकिन कहीं पर अनुभव न होने से उन्हें हर पल निराशा ही मिली। आखिरकार उन्हें शहर की कुछ महिलाओं ने नगर परिषद चंबा में कार्यरत नर्सी, पूनम और एनयूएलएम की समन्वयक रुचि महाजन से मिलकर किसी योजना के तहत लाभान्वित होने बारे सलाह दी।

आखिरकार उन्होंने नगर परिषद में तैनात महिला कर्मचारियों के साथ संपर्क साधा। इस पर उन्हें स्वयं सहायता समूह बना कर आगे बढ़ने की सलाह मिली। आखिरकार उन्होंने स्वयं सहायता समूह बनाया। बताया कि वर्ष 2006 में उन्होंने ब्यूटीशियन का कोर्स किया था। इसकी मदद से उन्होंने ब्यूटीपार्लर चलाने का निर्णय लिया। नप चंबा की मदद से उन्होंने कार्य आरंभ किया। सर्वप्रथम घर-घर जाकर महिलाओं के रूप सज्जा का कार्य करने लगीं।
विज्ञापन


मेहनत का परिणाम हमेशा मिलता है। इसी ध्येय के साथ कार्य में जुटी रहने पर धीरे-धीरे काम मिलना बढ़ता गया। बताया कि स्वयं सहायता समूह के बल ही उन्होंने अपने बेटी शिवानी को पढ़ाया-लिखाया। जिसके बाद बेटी ने हिम नवोदय नर्सिंग कॉलेज सुल्तानपुर से नर्स का प्रशिक्षण लिया। वर्तमान में वे गुड़गांव स्थित वेदांता अस्पताल में नौकरी कर रही है। इसके अलावा बेटे आकाश को भी पढ़ाया-लिखाया। वर्तमान में बेटा होटल मैनेजमेंट करने के बाद निजी सेक्टर में नौकरी कर रहा है।

बकौल सुमन (सुमित्रा) ने बताया कि अब तक वे 30 युवतियों को अपने स्तर पर निशुल्क प्रशिक्षित कर चुकी हैं। साथ ही 300 से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़ कर अपने पांव पर खड़ी करने की सीख दे चुकी हूं। बताया कि पुराने दिनों को याद करके उनके मन में टीस उठती है कि जब उन पर दुखों का पहाड़ टूटा तो किसी ने भी उन्हें सहारा नहीं दिया। महज नगर परिषद के स्टाफ और एनयूएलएम के तहत कार्यरत स्टाफ के मार्गदर्शन में उन्हें सहारा मिला।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें