परिजनों को युग की अस्थियां सौंपते
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बीते माह पिता ने उच्च न्यायालय में अपने बेटे के अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करने के लिए अस्तियां सौंपने की गुहार लगाई थी। इस पर शुक्रवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया और अस्थियां देने के आदेश दिए।
युग के पिता विनोद, मां और दादी का कहना है कि वे अब तक यही सोच रहे थे कि उनके लाडले की आत्मा आज तक शांत नहीं हुई है। इसकी आत्मा की शांति के लिए अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। अदालत ने उनकी संवेदनाओं और भावनाओं को समझते हुए अपना फैसला दिया।
अब वे युग के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कर सकेंगे। अस्थि कलश को गुरुद्वारा में रखने के बाद विनोद अपने घर लौटे और वहां उनके पूरे परिवार के बेटे की निर्मम हत्या के पांच साल पुराने सारे दर्द ताजा हो गए। पूरा परिवार युग को याद मायूस नजर आया।