शनिवार को जैसे ही पूर्णाहुति डाली कि अचानक फोन पर सूचना मिली कि सैनिक राजेश ऋषि का शव हिमखंड से बरामद कर लिया गया है। जवान के शहीद होने की सूचना के बाद रिश्तेदारों ने इसकी जानकारी शहीद के पिता रणजीत सिंह, माता माया देवी सहित पत्नी, भाई-भाभी को नहीं दी है।
परिजनों को सिर्फ इतना ही बताया गया कि राजेश मिल गया है, जिसे अस्पताल ले गए हैं। मां अपने लाल की सही सलामती के लिए अभी भी प्रार्थनाएं कर रही हैं, जबकि पिता की आंखें बरबस दरवाजे पर टकटकी लगाए हुए हैं कि कब उनका लाल घर लौटेगा।
इससे पहले बिलासपुर के जवान राकेश कुमार का शव हिमखंड गिरने के पहले ही दिन निकाल लिया गया था। मौसम खराब होने से सैनिक का पार्थिव शरीर शनिवार को हेलीकाप्टर से उनके पैतृक गांव नहीं लाया जा सका।
शव को सड़क मार्ग से लाया जा रहा है। रविवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार जगतपुर जोघों के श्मशानघाट में होगा। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी शहीद के पैतृक गांव पहुंच सकते हैं।
ठंड के थपेड़ों के बीच शनिवार सुबह लापता जवानों को खोजने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ। हिमखंड में दबे अन्य चार जवानों की तलाश में 500 जवान जुटे हैं। इनमें सेना, आईटीबीपी, डीआरडीओ, चंडीगढ़, कश्मीर और लद्दाख से आए ग्लेशियर विशेषज्ञ दल शामिल हैं।
शनिवार को भी बर्फबारी बाधा बनी। 8 से 12 फुट गहरे हिमखंडों को बेलचे और चैनसा से समूचे ग्लेश्यिरों को चारों ओर 10 सेक्शन में बांट कर तलाश की जा रही है।
एडीएम पूह शिव मोहन सैनी ने बताया कि नालागढ़ के जवान राजेश ऋषि का शव मिला है। रविवार को मौसम साफ रहा तो शव को उनके पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा। डीसी किन्नौर गोपाल चंद ने बताया कि सर्च ऑपरेशन लगातार जारी रहेगा।