इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खतरा
शोध के अनुसार 1,600 मीटर तक की ऊंचाई वाले इलाके और 5.9 से 16.4 डिग्री के बीच ढलान वाले क्षेत्र भूस्खलन और बाढ़ की चपेट में अधिक आते हैं।16.8 से 41.5 डिग्री के बीच के तीव्र ढलान और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाके हिमस्खलन और भूस्खलन दोनों के लिए संवेदनशील हैं। नदी घाटियों में बाढ़ और भूस्खलन अधिक होते हैं, जबकि अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ों में हिमस्खलन का जोखिम ज्यादा होता है। खड़ी पहाड़ी वाले ढलान और 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र सबसे अधिक खतरे में हैं।
प्राकृतिक आपदाओं के बीच संबंध
शोध में यह भी बताया गया कि एक प्रकार की प्राकृतिक आपदा किसी अन्य आपदा को जन्म दे सकती है। इसलिए आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियों में सुधार के लिए इस तरह के अध्ययनों का विशेष महत्व है। उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसी तरह की प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि वहां के लिए भी प्रभावी आपदा प्रबंधन रणनीतियां विकसित की जा सकें।