हिमाचल प्रदेश की सौ से ज्यादा लघु सिंचाई योजनाएं केंद्र सरकार के पास क्लीयरेंस न होने से अटकी हैं। एक साल होने को है, मगर अभी तक केंद्र सरकार ने इन पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
सबसे ज्यादा कांगड़ा जिले की 42 और शिमला की 28 स्कीमें फंसी हुई हैं। ये योजनाएं 338.52 करोड़ रुपये की लागत से बननी हैं। अभी तक 87.50 करोड़ रुपये बजट का ही प्रबंध किया गया है। इनसे 17,792 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होनी है।
ये लघु सिंचाई योजनाएं एक्सीलरेटिड एरिया बेनिफिट प्रोग्राम (एआईबीपी) के तहत बनाई जानी हैं। इन योजनाओं की शेल्फ केंद्र सरकार को 13 नवंबर 2014 को भेज दी गई थी। केंद्र सरकार ने ये योजनाएं फंडिंग की नई गाइडलाइंस के इंतजार में रोकी हैं।
इनमें मंडी जिले की 8, कुल्लू जिले की 12, किन्नौर की 1, लाहौल स्पीति की 2, सिरमौर की 10, सोलन की 2 और ऊना की भी 2 योजनाएं केंद्र सरकार के पास लंबित हैं।
सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने इन योजनाओं के केंद्र सरकार के पास अटके होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामला लगातार केंद्र सरकार से उठाया जा रहा है।