पहाड़ी मधुमक्खी के मुकाबले होती है ज्यादा फुर्तीली है मेलिफेरा, एक मिनट में जाती है 30 फूलों पर
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1600 रुपये किराये पर मिलेगा एक बॉक्स संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। बगीचों में सेब के पौधों में फ्लावरिंग के बाद परागण के लिए उद्यान विभाग के पास मधुमक्खियों की मांग बढ़ना शुरू हो गई है। जिले में सेब के बगीचों में परागण के लिए विदेशी मधुमक्खी एपिस मेलिफेरा की सबसे अधिक मांग है।
माना जाता है कि यह मधुमक्खी बेहद फुर्तीली होती है जो पहाड़ी मक्खी की तुलना में कम समय में ज्यादा फूलों पर जाती है। इससे परागण प्रक्रिया तेज होती है तथा पैदावार की संभावना बढ़ जाती है। इस साल भी बागवान बगीचों में परागण के लिए एपिस मेलिफेरा मधुमक्खी को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह पहाड़ी मधुमक्खी से ज्यादा फुर्तीली है। पहाड़ी मधुमक्खी दो से तीन मिनट में एक फूल पर जाती है। वहीं एपिस मेलिफेरा मक्खी एक मिनट में 25 से 30 फूलों पर पहुंच जाती है। इन दिनों सेब के बगीचों में फूलों से फलों के सेट होने की प्रक्रिया चल रही है। इसे परागण प्रक्रिया कहते हैं।
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बागवानी विभाग के मौनपालन विषय विशेषज्ञ डॉ. दलीप सिंह नरगेटा ने बताया कि हर वर्ष विभाग की ओर से डेढ़ लाख से अधिक बॉक्स परागण के लिए दिए जाते हैं। इस वर्ष भी बागवानों की मांग आना शुरू हो गई है। बताया कि एपिस मेलिफेरा इटेलियन मधुमक्खी है। विभाग के पास ज्यादातर इन्हीं मधुमक्खियों की मांग आ रही है। जिले में विभाग के दो वी किपिंग स्टेशन अणु और नवबहार स्थापित हैं। बक्सों की मांग आने पर यहां से बागवानों को सप्लाई भेजी जाती है। विभाग की ओर से एक महीने के लिए किराये पर दिए जाने वाले एक बॉक्स का मूल्य 1600 रुपये रखा है। इसके अलावा जो इनको खरीद कर स्वयं मधुमक्खियों का पालन करना चाहते हैं, उन्हें पेटी बाजार से खरीदने के बाद बिल विभाग को देना होगा। इसके बाद 50 पेटियों पर विभाग की ओर से बागवानों को 80 फीसदी की सब्सिडी दी जाएगी।
कोट 10 फीसदी फ्लावरिंग के बाद रखे बॉक्स बागवानी विभाग के मौन पालन विषय विशेषज्ञ डॉ. दलीप सिंह नरगेटा ने बताया जब सेब के बगीचों में 5 से 10 फीसदी फ्लावरिंग हो जाएगी उसके बाद परागण के लिए मधुमक्खियों के बॉक्स रखने चाहिए। मधुमक्खियां परागण करने के लिए क्रॉप चयनित करती हैं, जहां ज्यादा क्राॅप होगी, वह वहीं परागण करेंगी।
-डॉ दलीप सिंह नरगेटा, मौन पालन विषय विशेषज्ञ, बागवानी विभाग