विभिन्न राज्यों के 30 से ज्यादा प्रतिभागी ले रहे हिस्सा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के विधि विभाग में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतियोगिता में निर्णायकों के मूल्यांकन को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रतिभागी कॉलेजों और विद्यार्थियों की पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
प्रतियोगिता में पांच से अधिक राज्यों के 30 से ज्यादा प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस बार बहस का विषय महिला आरक्षण विधेयक रखा है। इसके लिए विधि विभाग में छह न्यायालय कक्ष तैयार किए हैं जहां प्रतिभागी न्यायालयीन कार्यवाही की तर्ज पर अपने पक्ष में कानूनी तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।
प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि भविष्य में वही वकील सफल होंगे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई जैसी नई तकनीकों का सही और प्रभावी इस्तेमाल करना जानते होंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत कानून व्यवस्था सुदृढ़ समाज की नींव है। मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. प्रीति सक्सेना ने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना भी है। मूट कोर्ट विद्यार्थियों को दूसरों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है। विधि विभाग के डीन एवं अध्यक्ष प्रो. डॉ. ललित डडवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में हर वर्ष मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. रमेश वर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।