डॉ. जनक राज
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इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनक राज ने बताया कि राजशानी शिमला में इन दिनों बंदरों के काटने के आठ से दस मामले हर दिन आ रहे हैं। शहर के लोग बेहद डरे हुए हैं। रोज बंदरों के काटने के मामलों की संख्या में इजाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि लोग बंदरों को खाने पीने की चीजें न डालें।
शहर के लोगों को बंदरों के आतंक से बचाने के लिए नगर निगम शिमला और वन्य जीव विभाग के माध्यम से तैनात किए मंकी वाचर कहीं नहीं दिख रहे हैं। कुछ दिन यह मंकी वाचर शहर में गुलेल और डंडों के साथ तैनात रहे लेकिन अब ये गायब हैं।
उपनगरों में लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है। राजधानी में जनवरी से लेकर जून माह तक 773 लोगों को बंदरों ने शिकार बनाया। आईजीएमसी में 366 और डीडीयू में 407 लोग हमले के बाद उपचार को पहुंचे। हाल ही में बंदर के हमले में घायल बच्चे को नाजुक हालत में पीजीआई रेफर किया गया है।
राजधानी के संजौली, ढली बाईपास, जाखू, पंथाघाटी, कसुम्पटी, विकासनगर, न्यू शिमला, कार्ट रोड, टूटीकंडी, लोअर बाजार, मिडल बाजार, चौड़ा मैदान और टुटू में बंदरों तथा आवारा कुत्तों का सबसे अधिक आतंक है। सबसे ज्यादा मामले यहीं से आते हैं।