आईएचबीटी संस्थान की लैब में खास तकनीक से इसे तैयार किया गया है। इसके फल की टेस्टिंग के बाद अगर सही पाया गया तो एनबीजीपीआर की हरी झंडी देने के बाद इसके पौधे दूसरी जगहों पर रोपे जाएंगे। मधुमेह के रोगियों को इससे पहले भी आईएचबीटी स्टीविया पौधे से निकली मिठास से मीठे का स्वाद दे चुका है।
आईएचबीटी के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि मांक फ्रूट पौधे से आने वाले दिनों में मधुमेह के रोगियों के लिए काफी लाभ होगा। इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों का वजन और ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ेगा, जिससे कई बीमारियों से छुटकारा मिलेगा।
क्या है मांक फ्रूट
मांक फ्रूट में जो फल लगेंगे उनसे विशेष प्रकार का पाउडर (मोंगरो साइड) निकाला जाएगा। इसे लोग चाय, दूध और मिठाइयों समेत अन्य चीजों में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें चीनी से तीन सौ गुणा अधिक मिठास होती है।