इसके लिए टीबी के रोगी का मोबाइल नंबर अस्पताल में रजिस्टर किया जाएगा। रोगी को उसी नंबर से यह फोन करना होगा। प्रदेश में इसी साल से यह कार्यक्रम शुरू किया गया है।
शुरुआती दौर में इस तरह की दवाई सिर्फ कुछ विशेष कैटेगिरी के लोगों को दी जा रही थी, लेकिन अब सभी मरीजों को यह दवाइयां देनी शुरू की गई हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. निसार मोहम्मद ने बताया कि फोन कॉल के बाद तमाम डाटा दिल्ली और शिमला में एकत्रित होगा।
इससे विभाग को पता चलेगा कि किस मरीज ने डोज ली और किसने नहीं। व्यक्तिगत रूप से भी मरीज का समय-समय पर फॉलोअप किया जाता रहेगा।
99 डॉट्स के तहत मरीज कहीं भी सफर कर सकता है। वह अपने कामकाज के लिए बाहर जा सकता है। इससे पहले टीबी के इलाज के दौरान मरीज को हर डोज लेने के लिए अस्पताल जाना पड़ता था। अब ऐसा नहीं है।
खास यह है कि इस कार्यक्रम के तहत मरीज को फोन कॉल करके और मेसेज भेजकर उनकी सेहत का स्टेटस भी बताया जाएगा। समय-समय पर होने वाले टेस्ट की रिपोर्ट भी ऑनलाइन की जा रही है। मरीज को फोन पर एहतियात बरतने संबंधी जानकारी भी दी जाएगी।