एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से होते हैं शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। एकादशी व्रत रखने के लिए दशमी तिथि से ही नियमों का पालन करना जरूरी होता है। दशमी तिथि के दिन व्रत रखने वाले भक्तों को एक ही समय और सात्विक भोजन खाना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पूर्णत: पालन करना चाहिए। द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करने तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी रविवार को मोहनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि शनिवार सुबह 11:22 बजे एकादशी तिथि शुरू होगी। रविवार को दोपहर 1:50 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी। उन्होंने बताया कि उदया तिथि के अनुसार रविवार को ही मोहिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा। बताया कि साल के सबसे पवित्र महीनों में वैशाख माह की गिनती की जाती है। पुराणों में इसे कार्तिक माह की तरह ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस माह आने वाली एकादशी भी बहुत महत्व रखती है। वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति मोह- माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। यह एकादशी भगवान श्रीकृष्ण को परम प्रिय है, जो व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत करता है, संसार में उसका प्रभाव बढ़ता है। इसके साथ ही मृत्यु के बाद मोहमाया के बंधनों से मुक्त होकर श्रीहरि के चरणों में पहुंचता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना करें।
पंडित उमेश ने बताया कि मोहिनी एकादशी व्रत को पारण सोमवार को होगा। सोमवार सुबह 5:28 से सुबह 8:12 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं। इस दौरान सबसे पहले भगवान की पूजा करें। इसके बाद योग्य ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद को भोजन करवाएं और दान करें फिर बाद में स्वयं भोजन कर व्रत खोलें।