फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल के पहाड़ों पर चली मोदी लहर में उड़ी कांग्रेस

Sat, 17 May 2014 09:10 PM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर/ अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
देश में मोदी की जैसी सुनामी दिख रही थी वह हिमाचल के पहाड़ों में अदृश्य थी। आमतौर पर रहस्यमयी खामोशी ओढ़े रखने वाले कठपुतली प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से हिमाचल की जनता भले नाराज हो लेकिन उसका अपने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से खासा लगाव दिखता है। इसलिए कोई उम्मीद नहीं कर रहा था कि हिमाचल से कांग्रेस का इस तरह सफाया हो जाएगा।
विज्ञापन


लेकिन जब हमेशा खामोशी से वोट देने वाले देश के पहले वोटर श्यामशरण नेगी ने वोट देने के बाद कहा कि वह मोदी को प्रधानमंत्री बना देखना चाहते हैं तो साफ हो गया देश के अंतिम छोर पर बैठे वोटर के दिल में क्या है।

सच कहा जाए तो हिमाचल में चुनावी जंग मोदी लहर बनाम वीरभद्र सिंह की थी। देखना यह था कि मोदी लहर को रोकने में वीरभद्र कितना कामयाब होते हैं।

पत्‍नी की सीट भी नहीं बचा पाए राजा

कांग्रेस को कम से कम दो सीट पर जीत की पक्की उम्मीद थी। एक मंडी जहां खुद वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह मैंदान में थीं। दूसरी सीट शिमला की थी जिसे 2009 के चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस हमेशा जीतती आ रही थी। शिमला को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। शिमला से कांग्रेस को इतनी लीड मिल जाती थी कि सोलन और सिरमौर में भाजपा का वोटबैंक उसके आगे नतमस्तक हो जाता था।

मोहनलाल ब्राक्टा भले यहां कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार हों लेकिन यहां से चुनाव मुख्यमंत्री ही लड़ रहे थे। मंडी में प्रतिभा हारीं। मंडी क्षेत्र का रामपुर हलका कांग्रेस का गढ़ है। उपचुनाव में प्रतिभा को यहां से 25,000 वोटों से लीड मिली थी, जो इस बार घटकर 10,000 रह गई। मंडी हारने के साथ ही यह तय हो गया था कि शिमला भी कांग्रेस के हाथ नहीं आने वाला। 7 मई को भाजपा के गढ़ सोलन और सिरमौर में हुई रिकार्ड वोटिंग ने साफ कर दिया था कि शिमला में फिर से भाजपा की वापसी होने वाली है।

तीनों सीटों पर भाजपा बंपर वोटों से जीती

देवभूमि में भाजपा के पास लोकसभा की तीन सीटें थीं। ऐसा नहीं कि भाजपा के इन सांसदों से हिमाचल की जनता बहुत संतुष्ट थी। हमीरपुर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की राह इतनी आसान नहीं थी। कांगड़ा में भाजपा के दूसरे सांसद राजन सुशांत पांच साल अपनी ही पार्टी से लड़ते रहे। शिमला से भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप ने पांच साल में ऐसा कोई चमत्कारिक काम नहीं किया जिससे जनता उन्हें फिर से जीताने पर मजबूर हो जाए।

राजन तो खैर आम आदमी पाटी के उम्मीदवार हो गए। लेकिन इन तीनों सीटों पर भाजपा बंपर वोटों से जीती। भाजपा प्रत्याशियों ने मोदी के नाम पर वोट मांगे और उन्हें रिकार्ड वोट मिले। अब तो लगता है कि अगर ये प्रत्याशी मोदी के नाम पर वोट न मांगते तो भी जनता इन्हें वोट देती क्योंकि वह मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती थी। चौथी सीट मंडी भाजपा की नहीं थी। भाजपा ने इस सीट के लिए जब संगठन के गुमनाम -से नेता रामस्वरूप को टिकट दिया, तो कहा गया कि भाजपा मंडी में कमजोर उम्मीदवार देकर कांग्रेस के आगे नतमस्तक हो गई।
विज्ञापन

शांता को अपने कद का फायदा मिला

लेकिन मोदी लहर और रामस्वरूप के जमीनी कार्यकर्ता होने ने उन्हें सांसद बना दिया। अकेले शांता कुमार ऐसे नेता रहे जिन्हें मोदी लहर के अलावा अपने कद का फायदा मिला। खुद मोदी ने हिमाचल आकर पूरी शालीनता से स्वीकार किया था कि उन्होंने शांता की उंगली पकड़ कर राजनीति सीखी। प्रदेश में जिसकी सरकार होती है लोकसभा चुनाव में पब्लिक उसी पार्टी के साथ रहती है। लेकिन मोदी लहर ने इस परम्परा को तोड़ दिया।

सूबे के मंत्रियों के हलके में कांग्रेस बुरी तरह पिटी। और तो और कांग्रेस उपचुनाव में सुजानपुर भी हार गई। इस लहर में भाजपा के बागी राजेन्द्र राणा खुद तो हारे ही अपनी पत्नी की सीट भी नहीं बचा पाए। हिमाचल को केन्द्र से बहुत उम्मीदें हैं। पहली उम्मीद देश में गुड गवर्नेस की है। इसके अलावा इस सूबे को रेलवे लाइन चाहिए। सेब की उचित कीमतें, नए उद्योग धंधे, रोजगार और पीने के लिए साफ पानी चाहिए। हिमाचल ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का साफ जनादेश दिया इसलिए इस सूबे को अब सच में अच्छे दिनों का इंतजार रहेगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें