हिमाचल विधानसभा में शुक्रवार को अलग ही नजारा रहा। सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हाथापाई हो गई। यह हंगामा संजौली कॉलेज में मारपीट पर विपक्ष की चर्चा की मांग के दौरान नारेबाजी से खड़ा हुआ। सीपीएस नीरज भारती के खिलाफ सीएम की तल्खी से विपक्ष उखड़ गया। इसके बाद कांग्रेस और भाजपा के विधायकों में जमकर धक्का-मुक्की हुई।
इसी बीच दोनों पक्षों के सदस्य वेल में पहुंच गए। यहां हाथापाई होने लगी। विधायक एक दूसरे को धक्के मारकर खुद को सही बताने की कोशिश करने लगे। मंत्री जीएस बाली और मुकेश अग्निहोत्री बीच-बचाव करते रहे और तब मामला कुछ शांत किया। मामला बेकाबू होता देखा स्पीकर ने बैठक को थोड़े समय के लिए स्थगित कर दिया।
भाजपा ने की सदन में नारेबाजी
इस दौरान भाजपा विधायक तो वेल में ही बैठ गए। लंबे समय तक नारेबाजी चलती रही, जिसके बाद विपक्ष के सदस्य वेल में बैठे रहे। लगभग 15 मिनट के ब्रेक के बाद 12 बजकर 35 मिनट पर सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। विपक्ष की नारेबाजी के बीच ही विधेयकों को पारित करने की प्रक्रिया और अन्य कार्यवाही चलती रही।
भोजनवकाश से पहले ही सदन की बैठक को स्थगित कर दिया गया। प्रश्नकाल के समाप्त होने की स्पीकर की घोषणा के बीच मनाली के भाजपा विधायक गोविंद ठाकुर ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर की बात करते हुए कहा कि संजौली कॉलेज के एक प्रधानाचार्य एक छात्रा को बालों से खींचते हैं। इस पर चर्चा होनी चाहिए। इस पर स्पीकर बोले कि वह ऑफ हैंड कुछ नहीं कर सकते। उनके पास लिखित में कुछ नहीं है।
सीएम ने दिया जवाब
इसे सरकार के ध्यान में भी लाए जाने की जरूरत है। इस पर वीरभद्र सिंह ने भाजपा विधायकों को कहा कि वे गुंडागर्दी का समर्थन कर रहे हैं। इस कॉलेज में भाजपा से संबंधित एबीवीपी के छात्रों ने प्रधानाचार्य और उनकी पत्नी से मारपीट की। ऐसे छात्रों को निष्कासित किया जाएगा। भाजपा विधायकों ने राज्य सरकार को महिला विरोधी बताते हुए सदन में नारेबाजी शुरू की।
इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष के लोग गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। सीएम बोले कि प्रदेश में गुंडागर्दी नहीं चलेगी। इसी बीच विपक्ष के सदस्यों ने मुख्य संसदीय सचिव शिक्षा नीरज भारती के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वीरभद्र सिंह ने सीपीएस नीरज भारती के खिलाफ नारेबाजी के दौरान एक शब्द पर आपत्ति दर्ज की तो भाजपा के सदस्य सदन में नीरज भारती की ओर से फेसबुक पर की गई टिप्पणियों के प्रिंट लहराने लगे।
सीएम के जवाब पर भाजपा ने किया करारा पलटवार
सीएम वीरभद्र ने इस बीच नारेबाजी करते विपक्ष के सदस्यों को मर्यादा में न रहने की बात कर सदन से बाहर जाने को कहा, जिस पर विपक्ष के सदस्य वेल की ओर आए। इसी बीच भाजपा विधायक सतपाल सत्ती मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सामने खडे़ हो गए। उनके सामने फेसबुक टिप्पणियों के प्रिंट पटकने लगे। इन्हें वीरभद्र सिंह ने उठाकर उल्टा सत्ती की ओर फेंका।
सत्ती ने फिर मुख्यमंत्री की ओर फेंका तो इसी बीच सत्ता पक्ष की ओर से सीपीएस नीरज भारती और अन्य विधायक वेल में नारेबाजी करते भाजपा विधायकों की तरफ आए। फिर कांग्रेस विधायकों और भाजपा विधायकों की हाथापाई होने लगी। सत्ता पक्ष के कई विधायक भी वेल में विपक्ष के विधायकों से गुत्थम-गुत्था होने लगे। हाथापाई के बीच मंत्री जीएस बाली और मुकेश अग्निहोत्री बीच बचाव करते रहे।
खुद गुंडागर्दी कर रहे सीएम, पद की गरिमा भूले : धूमल
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष प्रो. प्रेमकुमार धूमल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर सदन में गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया। शुक्रवार को भोजनावकाश के दौरान प्रेस को संबोधित करते हुए धूमल ने कहा कि वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री पद की गरिमा को भूल गए हैं। छह बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनका रवैया शर्मनाक है। उन्हें तो सदन में उत्पन्न हुए व्यवधान को समाप्त करने के प्रयास करने चाहिए।
लेकिन वीरभद्र सिंह ने ऐसा करने की बजाय सत्ता पक्ष को इशारा कर नारेबाजी करने के लिए खड़ा किया। कहा कि साल 1998 में वीरभद्र सिंह तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष गुलाब सिंह ठाकुर और तत्कालीन विधानसभा सचिव अजय भंडारी पर भी कागज फाड़कर फेंक चुके हैं। शुक्रवार को भी उन्होंने वही वाक्या दोहराया।
विधायक और भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती मुख्यमंत्री को सीपीएस (शिक्षा) नीरज भारती की सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई अश्लील टिप्पणियों और चित्रों को दिखाने गए थे। मुख्यमंत्री ने कागज देखने की बजाय उन्हें फाड़ दिया और विधायक सत्ती पर फेंक दिया। धूमल ने कहा मुख्यमंत्री को इस तरह का व्यवहार शोभा नहीं देता।
बयान रोज बदलने हैं तो घर पर बैठें सीएम : सत्ती
भाजपा अध्यक्ष और विधायक सतपाल सत्ती ने कहा मुख्यमंत्री रोज बयान बदलते हैं। उन्हें बातें याद नहीं रहती। ऐसे में मुख्यमंत्री को घर पर बैठ जाना चाहिए। कहा मैं मुख्य सीपीएस नीरज भारती की फेसबुक पर पोस्ट की गई अश्लील टिप्पणियों को मुख्यमंत्री के ध्यान में लाने के लिए उनके पास गया था, लेकिन मुख्यमंत्री ने ध्यान की बजाय कागज फाड़ कर मुझ पर ही फेंक दिए।
बताया कि नीरज भारती ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्री सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी के खिलाफ अश्लील टिप्पणियां की हैं। कई अन्य चित्रों पर प्रधानमंत्री का चेहरा लगाया गया है। नीरज भारती को यह शोभा नहीं देता है। नीरज भारती की इन पोस्ट को सभी विधायकों और हाईकमान को भेजा जाएगा। आईटी एक्ट के तहत पुलिस थाना में मुकदमा दर्ज करवाने पर भी पार्टी विचार करेगी।
डेपुटेशन पर गए अध्यापक होंगे वापस
हिमाचल में डेपुटेशन पर गए सभी अध्यापकों को वापस बुलाया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह जानकारी शुक्रवार को अर्की से भाजपा विधायक गोविंद राम शर्मा के सवाल के जवाब में सदन में दी। सीएम ने कहा कि ये डेपुटेशन उनकी अनुमति से नहीं हुए हैं। उनके अनुसार बच्चों की पढ़ाई को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
गोविंद राम शर्मा ने सवाल किया था कि जिला शिमला में ऐसे कितने जेबीटी, सीएंडवी और टीजीटी हैं, जो दूसरी पाठशालाओं में प्रतिनियुक्ति पर हैं? इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि जिला शिमला में 57 जेबीटी, दो सीएंडवी और 10 टीजीटी प्रतिनियुक्ति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये डेपुटेशन उनकी अनुमति से नहीं हुए हैं। सारे प्रदेश में ही इसी तरह की प्रतिनियुक्तियां हुई हैं।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि सदन में यह मामला आने से पहले ही उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा को कहा है कि वे इन सारी प्रतिनियुक्तियों को निरस्त करें। उन्होंने आदेश किए हैं कि जो डेपुटेशन सरकार की अनुमति के बगैर किए गए हैं, उन्हें निरस्त किया जाएगा।
अधिवक्ता के लिपिकों के लिए विशेष निधि
सरकार अधिवक्ताओं के पास लगे लिपिकों के लिए विशेष निधि का गठन करेगी। इसमें इनके परिजनों को मृत्यु पर 50 हजार रुपये तक की राशि का प्रावधान किया है। राजस्व एवं कानून मंत्री कौल सिंह ने बुधवार को यह विधेयक पेश किया था। शुक्रवार को इसे विस में पास किया गया। विधेयक का नाम अधिवक्ताओं के क्लर्कों की कल्याण निधि विधेयक-2015 है।
इसके मुताबिक सुप्रीमकोर्ट में लिपिक एसोसिएशन वर्सिस यूनियन ऑफ इंडिया एंड अदर्स के नाम से एक याचिका दायर की गई है। इसमें हिमाचल सरकार को भी पार्टी बनाया है। अधिवक्ताओं ने इसमें कहा है कि वे अवकाश के दिन भी कार्य करते हैं। विधिक सेक्टर में उनकी सेवाएं अति आवश्यक हैं, जिसमें वे अनुपस्थित नहीं रह सकते हैं।
इनके परिवार के सामाजिक सरोकार को लेकर किसी तरह की सुविधा नहीं है, इसलिए सरकार किसी कल्याण निधि का गठन कर इन क्लर्कों और इनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे। इसके लिए सरकार सदन में विधेयक लाई है। इसके तहत कल्याण निधि का गठन होगा। इस निधि में जो धनराशि विभिन्न प्रकारों से जुटाई जाएगी, उससे लिपिकों के परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।