प्रदेश के शीतकालीन स्कूलों में शुक्रवार को हुई आठवीं कक्षा की अंग्रेजी के परीक्षा पत्र में कई खामियां सामने आई हैं। सौ नंबर के प्रश्नपत्र में 97 नंबर के ही सवाल पूछे गए। सभी प्रश्नों को अंक जोड़ कर सौ नहीं बन सके। इसके अलावा प्रश्न पत्र से प्रश्न संख्या नौ और 11 भी गायब रही।
प्रश्न पत्रों में हुई इस गड़बड़ी ने छात्रों को काफी समय तक असमंजस में डाले रहा। उधर, स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव विनय धीमान का कहना है कि त्रुटियां कैसे हुई, इसे जांच जाएगा। उन्होंने बताया कि आठवीं तक सिर्फ छात्रों का मूल्यांकन होता है, उन्हें अंक नहीं दिए जाते। ग्रेडिंग से ही परिणाम तय होता है। अगर सौ नंबर नहीं भी बन रहे हैं तो कम अंकों के आधार पर ही ग्रेडिंग कर दी जाएगी। प्रश्नों की संख्या का गायब होना प्रिंटिंग की समस्या हो सकती है। इसे जांच जाएगा।
प्रदेश में पहली से आठवीं कक्षा तक किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जाता है। वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर ही छात्रों का मूल्यांकन कर उन्हें अगली कक्षा में बिठा दिया जाता है। इस व्यवस्था का नौवीं कक्षा में छात्रों को पहुंचने पर नुकसान झेलना पड़ता है। नई शिक्षा नीति को लेकर समाज के अधिकांश वर्गों से इस व्यवस्था को समाप्त कर पहले की तरह पास और फेल को शुरू करने की सिफारिश की है।