मुख्यमंत्री कार्यालय से तबादलों पर रोक लगने के बाद मंत्रियों ने राहत की सांस ली है। शुक्रवार को मंत्रियों ने अपने विभागों के सचिवों को निर्देश दिए है कि तबादले की फाइल कार्यालय न भेजें। चाहे वह फाइल पुरानी ही क्यों न हो। अभी तक मंत्रियों के पास अन्य कार्यों की अपेक्षा तबादला फाइलों के ढेर लगे रहे थे।
सबसे ज्यादा फाइलें शिक्षा विभाग और उसके बाद स्वास्थ्य और आईपीएच विभाग की होती हैं। अब सामान्य तबादलों पर रोक लगाने से मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्री और सचिवालय के कर्मचारियों पर तबादलों की मारामारी 31 मार्च तक खत्म हो गई है।
सचिवालय से प्रतिदिन सैकड़ों डीओ नोट निकलते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय इन डीओ नोटिस की एंट्री कराने में ही व्यस्त रहता है। तबादलों की मारामारी के चलते मुख्यमंत्री और मंत्रियों की हर ब्रांच में दो से तीन कर्मचारी इसी काम में लगाए हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय से तबादलों की फाइल क्लीयर होने के बाद सचिवों पर भी आगामी ऑर्डर जारी करने का दबाव रहता है। अब 31 मार्च तक इन सभी गतिविधियों पर विराम लग गया है।
सीएम को जाती है तबादलों की फाइलें
मंत्रियों के सिफारिश और डीओ नोट जारी करने के बाद तबादलों की फाइलें मुख्यमंत्री को जाती है। सीएम की अनुमति के बाद सचिव और निदेशक तबादला आदेश जारी करते हैं।