हिमाचल के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के चक्कर में सरकार बच्चों के लिए दोपहर के समय पौष्टिक आहार के लिए बजट मुहैया कराना ही भूल गई है। शिक्षकों की मांग के अनुसार सरकार ने सरकारी स्कूलों में अक्तूबर से नर्सरी की कक्षाएं तो शुरू कर दी हैं, लेकिन इन नौनिहालों को दोपहर के समय अन्य विद्यार्थियों की तरह आहार देने के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हो पाई है। अब स्कूल प्रबंधन अपने खाते से नर्सरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को मिड-डे मील खिला रहे हैं।
स्कूलों में मिड-डे मील के लिए राशन की सप्लाई बच्चों की पंजीकृत संख्या के हिसाब से होती है। इसी संख्या पर प्रति विद्यार्थी मिड-डे मील का बजट जारी होता है। स्कूलों के पास चूंकि नर्सरी कक्षा के विद्यार्थियों का बजट नहीं है। ऐसे में अन्य विद्यार्थियों के हिस्से से ही दोपहर का खाना खिलाया जा रहा है। यही वजह है कि विद्यार्थियों को भरपेट मिड-डे मील नहीं मिल पा रहा है।