हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा तक बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब दोपहर का भोजन बच्चों को उनके माता-पिता या एसएमसी सदस्य से चखाने के बाद परोसा जाएगा। उनकी अनुमति के बाद ही बच्चों को खाना दिया जाएगा। हर दिन किसी न किसी बच्चे के अभिभावकों को स्कूल आकर खाना टेस्ट करना होगा। खाने का स्वाद, गुणवत्ता को लेकर भी उन्हें बताना होगा। इसके लिए उनके हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार प्रदेश भर में प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के 5.34 लाख बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जा रहा है। पहले जैसा भी खाना बनाया जाता था, उसे सीधे बच्चों को बांट दिया जाता था। इसकी वजह से बच्चों को कई बार खराब खाना मिल जाता था। लेकिन अब इस नए निर्देश के बाद अभिभावक या फिर एमडीएम प्रभारी को पहले खाने की टेस्टिंग करनी होगी। स्वाद के अलावा खाने की क्वालिटी भी चेक की जाएगी। अगर खाने में कोई भी आपत्ति दिखेगी, तो उसे बच्चों को नहीं परोसा जाएगा। उनसे अनुमति मिलने के बाद ही खाना बच्चों के बीच बांटा जाएगा। एमडीएम के जिला नोडल अधिकारी राज कुमार पराशर ने बताया कि सभी स्कूलों को जारी आदेशों के तहत खाना वितरण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसकी जांच भी की जाएगी। इसमें कब और किस दिन कौन से अभिभावक ने खाने का स्वाद चखा इसका भी रिकॉर्ड रखना होगा। जिसमें अभिभावक के हस्ताक्षर होने भी जरूरी है।