केंद्र और राज्य सरकार पर कर्मियों का शोषण करने का आरोप लगाते हुए मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने 17 जनवरी को एक दिन की हड़ताल करने का फैसला लिया है।
मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (संबंधित सीटू) की राज्य कमेटी ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार मिड डे मील वर्कर्स के वेतन में बढ़ोतरी की बात करती हैं, लेकिन उसे लागू नहीं करतीं।
मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष हिमी देवी ने बताया कि केंद्र सरकार की अनदेखी के चलते 17 जनवरी को पूरे प्रदेश में हड़ताल करने का फैसला लिया गया है।
नौ साल से उन्हें केवल एक हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। महंगाई कई गुणा बढ़ने के बावजूद मिड डे मील वर्कर्स को राहत देने के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि मिड डे मील वर्कर्स को प्रतिमाह 6300 रुपये वेतन दिया जाए।
45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार वर्कर्स को पक्का किया जाए। मिड डे मील वर्कर्स की नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की संख्या शर्त को हटाया जाए। प्रत्येक पाठशाला में दो मिड डे मील वर्कर्स की नियुक्ति की जाए।
प्रसूति अवस्था के दौरान महिला को वेतन सहित कम से कम चार महीने का अवकाश दिया जाए। मिड डे मील वर्कर्स को दस महीनों के बजाय 12 महीनों का वेतन दिया जाए। वर्कर्स को नियुक्ति पत्र दिए जाएं।
स्कूलों में मिलने वाली छुट्टियां वेतन सहित दी जाएं। हिमी देवी ने कहा कि 17 जनवरी को सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी अगर सरकार ने मांगों को पूरा नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।