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केंद्र के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों कर्मचारी, स्कूलों में ऐसे बना खाना

Thu, 18 Jan 2018 10:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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राज्य में मिड डे मील, आंगनबाड़ी और आशा वर्कर्स ने जिला मुख्यालयों में किया प्रदर्शन किया।  सीटू के बैनर तले आंगनबाड़ी वर्कर्स, हेल्पर, मिड डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर्स ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। 

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प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से न्यूनतम वेतन लागू करने और वर्कर्स को नियमित करने की मांग उठाई। वर्कर्स ने जिला उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आठ सूत्री मांगपत्र भेजा। 

मिड डे मील वर्कर्स की हड़ताल से निपटने के लिए बुधवार को प्रदेश के ग्रीष्मकालीन सरकारी स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से भोजन बनवाया गया। सीटू के राज्य अध्यक्ष जगतराम ने बताया कि बुधवार को कांगड़ा, शिमला, ऊना, हमीरपुर, चंबा, कुल्लू, सिरमौर, मंडी, किन्नौर, सोलन और बिलासपुर के जिला मुख्यालयों, तहसील और ब्लाक स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। 

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वर्करों ने ये मांगें उठाईं 

केंद्र सरकार मिड डे मील, आंगनबाड़ी और आशा योजना को बंद कर ठेके पर देने के प्रयास में है। इसी कड़ी में बजट में कटौती की जा रही है। 45वें श्रम सम्मेलन में फैसला लिया गया था कि आंगनबाड़ी महिलाओं, मिड डे मील वर्कर्स और आशा वर्कर्स को पक्का किया जाए।

उन्हें सेवानिवृत्ति पर पेंशन और ग्रेच्युटी दी जाए। ईपीएफ योजना लागू की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन फैसलों को लागू करने में आनाकानी कर रही है। सीटू अध्यक्ष ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सभी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो प्रदेश भर में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे।

जगतराम ने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर्स को नियमित किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर को हरियाणा की तर्ज पर 8500 और 4500 रुपये वेतन दिया जाए।

मिड डे मील और आशा वर्कर्स को 6300 रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाए। मिड डे मील वर्कर्स से संबंधित 25 बच्चों की संख्या की शर्त को हटाया जाए। मिड डे मील योजना में केंद्रीय किचन खोलने और एनजीओ को देने के फैसले को वापस लिया जाए। 
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