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शिमला: ग्लेशियर से निकलने वाली ऊहल नदी में भी मिले माइक्रोप्लास्टिक, तलछट में भी प्रदूषण की मौजूदगी

Mon, 28 Sep 2026 07:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

कुकर गुंधा नदी का ऐसा क्षेत्र है, जहां मानवीय हस्तक्षेप अपेक्षाकृत कम है और यह निकटतम गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है। बावजूद यहां पानी में औसतन 55 से 65 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति लीटर और तलछट में 89 से 103 कण प्रति किलोग्राम मिले। 
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धर्मशाला की धौलाधार पहाड़ियां... - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की धौलाधार पर्वतमाला में थमसर ग्लेशियर से निकलने वाली ऊहल नदी में भी माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण की मौजूदगी सामने आई है। अध्ययनकर्ताओं ने ऊहल नदी के तीन स्थानों कुकर गुंधा, जीरो प्वाइंट और बरोट से पानी और तलछट के नमूने लिए। 

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अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा के साथ उनके आकार, रंग और रासायनिक संरचना की भी जांच की गई। पानी और तलछट दोनों में माइक्रोप्लास्टिक की मौजूदगी मिली। कुकर गुंधा नदी का ऐसा क्षेत्र है, जहां मानवीय हस्तक्षेप अपेक्षाकृत कम है और यह निकटतम गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर है। बावजूद यहां पानी में औसतन 55 से 65 माइक्रोप्लास्टिक कण प्रति लीटर और तलछट में 89 से 103 कण प्रति किलोग्राम मिले। 

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