यहां रहना आसान नहीं है। ऐसे में प्रदेश सरकार का दायित्व है कि वो विस्थापितों के लिए राज्य में ही जमीन उपलब्ध करवाए। जिसका खर्च राजस्थान सरकार से लिया जा सकता है। कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को बैठक कर पौंग बांध विस्थापितों की समस्या का हल निकालने के आदेश दिए व बातचीत संबंधी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखने को कहा है।
हिमाचल में पौंग बांध में हजारों लोगों की भूमि चली गई है। 16352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में दो लाख 20 हजार एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। अभी भी 5000 पौंग बांध विस्थापित पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं। पौंग डैम बनाने के लिए वर्ष 1971 में भूमि का अधिग्रहण हुआ था। तब से लेकर अब तक विस्थापित पुनर्वास के लिए दर दर भटकने को मजबूर हैं।