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पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास मामले पर 18 फरवरी को बैठक

Fri, 11 Jan 2019 10:55 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हाईकोर्ट में पौंग डैम विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़े मामलों पर सुनवाई 20 मार्च के लिए टल गई है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि विस्थापितों के हिमाचल में ही पुनर्वास को लेकर नीतिगत फैसले के लिए राजस्थान और हिमाचल सरकार के मुख्य सचिवों की बैठक 18 फरवरी को निर्धारित की गई है। 

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हाईकोर्ट ने हिमाचल और राजस्थान की सरकार के मुख्य सचिवों को आदेश दिए हैं कि वह पौंग बांध विस्थापितों का हिमाचल में ही पुनर्वास करने के लिए सचेत नीति बनाएं। राजस्थान सरकार के खर्चे पर विस्थापितों के लिए उपयुक्त जमीन खरीदने का प्रावधान हो।

कोर्ट ने इस बाबत जरूरी पड़ने पर उच्च स्तरीय बैठक कर नीतिगत फैसला लेने के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह प्रदेश में ही पुनर्वास के लिए जमीन की तलाश करे और उसका पूरा खर्च राजस्थान सरकार से लिया जाए।
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कोर्ट ने दोनों सरकारों को आपस में बैठकर इसका समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस अजय मोहन गोयल की खंडपीठ को मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि राजस्थान सरकार से बातचीत चल रही है।

दोनों सरकारों के मुख्य सचिवों की बैठक 18 फरवरी को है। इन मामलों पर पिछली सुनवाई में बताया गया था कि पौंग बांध विस्थापितों को राजस्थान के जैसलमेर और बीकानेर के कठिन क्षेत्रों में पुनर्वास के नाम पर जमीन दी जा रही है।

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स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखने को कहा

यहां रहना आसान नहीं है। ऐसे में प्रदेश सरकार का दायित्व है कि वो विस्थापितों के लिए राज्य में ही जमीन उपलब्ध करवाए। जिसका खर्च राजस्थान सरकार से लिया जा सकता है। कोर्ट ने दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को बैठक कर पौंग बांध विस्थापितों  की समस्या का हल निकालने के आदेश दिए व बातचीत संबंधी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखने को कहा है।

हिमाचल में पौंग बांध में हजारों लोगों की भूमि चली गई है। 16352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में दो लाख 20 हजार एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी। अभी भी 5000 पौंग बांध विस्थापित पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं। पौंग डैम बनाने के लिए वर्ष 1971 में भूमि का अधिग्रहण हुआ था। तब से लेकर अब तक विस्थापित पुनर्वास के लिए दर दर भटकने को मजबूर हैं।
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