ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म और छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए केंद्र विशेष अनुदान और उदार वित्तीय सहायता दे। राज्य में कुल 27 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता में से मात्र 10547 मेगावाट का ही दोहन हो पाया है।
राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आईपीडीएस और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की अवधि को एक वर्ष और बढ़ाने का आग्रह किया। कहा कि राज्य केवल पर्यावरण मित्र विद्युत उत्पादन कर रहा है।
प्रदेश में ताप विद्युत उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। प्रदेश में उपयोग में लाई जा रही 90 फीसदी ऊर्जा पर्यावरण मित्र है। राज्य सरकार जल विद्युत क्षेत्र व पर्यटन के साथ मिलकर प्रदेश में हाइड्रो पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है
ताकि दोनों क्षेत्रों को राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए उपयोग में लाया जा सके। राज्य सरकार की इस पहल में केंद्र, संयुक्त क्षेत्र उपक्रमों और बीबीएमबी में अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने सभी जल विद्युत परियोजनाओं को अक्षय ऊर्जा के अधीन लाने का आग्रह किया। कहा कि सौर ऊर्जा उत्तरदायित्व प्रावधानों की तरह जल विद्युत उत्तरदायित्व प्रावधान भी बनाए जाने चाहिए। इसके लिए अलग से निविदा दस्तावेज तैयार किया जाना चाहिए।
मध्यावधि ऊर्जा खरीद के लिए बनाए केंद्र के निविदा दस्तावेज केवल थर्मल ऊर्जा खरीद के लिए ही व्यावहारिक है। जल विद्युत के लिए यह प्रासंगिक नहीं है। सौर ऊर्जा की तरह जल विद्युत को भी व्हीलिंग चार्जिज से मुक्त किया जाना चाहिए।