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सरकार के हाथ खड़े, कहा हमारे पास नहीं पैसा

Fri, 14 Nov 2014 01:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल सरकार ने सातवें आयोग के सामने विस्तार से अपना पक्ष रखा। सरकार की ओर से आयोग को बताया गया कि राज्य में बजट का 38 फीसदी हिस्सा खर्च किया जाता है। ऐसे में अगर बहुत अधिक वेतन बढ़ाने की सिफारिशें की गई तो प्रदेश सरकार को और अधिक वित्तीय संकट से जूझना पड़ेगा।
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प्रदेश की माली हालत ठीक नहीं है। कर्ज लेकर हिमाचल का वित्तीय प्रबंधन करना पड़ रहा है। ऐसे में अगर अगले दो साल के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी गई तो सरकार को वित्तीय संकट से उबर पाना बेहद मुश्किल होगा।

सरकार की ओर से आयोग के सामने एक-एक आंकड़े विस्तार से रखे गए। यह भी बताया गया कि हिमाचल प्रदेश पर्वतीय राज्य है, जिसके कारण आय के बहुत अधिक स्रोत नहीं है। प्रदेश में आय के पर्याप्त संसाधन न होने के कारण हिमाचल को वित्तीय संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। मुख्य सचिव पी मित्रा सहित प्रदेश के अन्य सीनियर अफसरों ने आयोग के पदाधिकारियों से मिलकर हिमाचल का पक्ष रखा।
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वेतन आयोग के सचिव से मिले प्रवक्ता
शिमला। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को परम देव शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश के दौरे पर आए सातवें वेतन आयोग के सचिव और सदस्यों से मिला। यहां जारी बयान में मुख्यालय सचिव संजय देष्टा ने कहा कि वेतन आयोग के सचिव मीना अग्रवाल को संघ ने एक ज्ञापन सौंपा।

इसमें आज तक किए गए अन्याय को नहीं दोहराने की मांग उठाई गई। इसके अलावा राजकीय अर्द्ध राजकीय चालक एवं परिचालक महासंघ का एक प्रतिनिधिमंडल भी प्रदेशाध्यक्ष शांतिस्वरूप की अध्यक्षता में भारत सरकार के सातवें वेतन आयोग से मिला। आयोग को चालक वर्ग से हुए अन्याय की जानकारी दी गई। परिवहन निगम के कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रधान देवराज ठाकुर की अध्यक्षता में आयोग से भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
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