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अरे ये क्या! महंगी होंगी हिमाचल में निर्मित दवाएं

Wed, 23 Apr 2014 10:51 AM IST
अखिलेश महाजन/ अमर उजाला, सोलन
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हिमाचल में बन रहीं दवाएं महंगी होंगी। आवश्यक श्रेणी की दवाओं में 6.32 और अन्य दवाओं की दरों में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसके लिए राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने नई दवा मूल्य निर्धारण नीति के तहत कंपनियों को छूट दे दी है।
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यह बढ़ोतरी सालाना थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित होगी। हिमाचल में दवाइयां बना रहीं 150 से अधिक कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने की मंशा से एनपीपीए को अवगत करा दिया है।

यहां लगभग 600 कंपनियां दवाइयां बना रहीं हैं। नई पॉलिसी के अनुसार कीमतें बढ़ाने से 15 दिन पहले कंपनियों को एनपीपीए को सूचित करना आवश्यक है।
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348 दवाएं जरूरी श्रेणी में

राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण ने 348 दवाओं को जरूरी श्रेणी में रखा है। इस श्रेणी की दवाओं के एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइज) में वार्षिक 6.32 फीसदी तक बढ़ोतरी करने की छूट दी है।

इनमें सर्दी, जुकाम, बुखार, एंटीबायोटिक, बीपी, मधुमेह, हृदय रोग आदि की दवाएं शामिल हैं।

2012 में मिली थी अनुमति

कंपनियों को दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी करने की छूट वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने दी थी। इसे पहली अप्रैल से लागू किया जाना था। वित्त वर्ष 2013-14 में (डब्ल्यूपीआई) थोक मूल्य सूचकांक 7.37 फीसदी रहा।

इसमें 5.93 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। 2014-15 में एशियन डेवलपमेंट बैंक ने इसके छह फीसदी तक पहुंचने का अनुमान दिया है। इस आधार पर पहली अप्रैल से कीमतें बढ़ाने की सिफारिश की गई है।
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नई दवा मूल्य निर्धारण नीति में है यह प्रावधान

फार्मा विंग लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने बताया कि नई दवा मूल्य निर्धारण नीति में यह प्रावधान है।

इसके आधार पर ही उद्यमियों ने चेयरमैन एनपीपी को कीमतें बढ़ाने की सूचना दी है। इसमें भी कई पेचीदा औपचारिकताएं हैं, जिनकी पूर्ति की जा रही है।
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