हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन और मंडी इकाई ने डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजूकेशन (डीएमई) के पद पर एचएएस अधिकारी तैनात करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। मंडी में शुक्रवार को आयोजित एसोसिएशन की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जिसने मेडिकल एजूकेशन यानी एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं की है, उसे डीएमई बनाना खिलवाड़ करना होगा।
संघ का दावा है कि सरकार डीएमई के पद के लिए कई कड़े नियम बना चुकी है। इसमें यदि स्वास्थ्य विभाग में उन नियमों के तहत कोई वरिष्ठ चिकित्सक या विशेषज्ञ पात्र नहीं होता तो एचएएस स्तर के अधिकारी को कॉलेज में इस पद पर तैनात कर दिया जाएगा।
बैठक में मेडिकल कॉलेज में डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजूकेशन के पद पर एचएएस को रखने के प्रस्ताव का बहिष्कार किया है। संघ के प्रधान डॉ. जितेंद्र रुड़की ने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई के बिना किसी को मेडिकल कॉलेज एजूकेशन का डायरेक्टर बनाने का प्रस्ताव हास्यास्पद है। एक एचएएस अधिकारी मेडिकल कालेज सही ढंग से कैसे चलाएगा?
कॉलेजों में प्रिंसिपल का सेवा विस्तार हो रद्द
संघ के महासचिव डॉ. विकास ठाकुर ने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में प्रिंसिपल के सेवा विस्तार को शीघ्र रद्द किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के विभिन्न विभागों से सेवा विस्तार को रद्द करने के निर्णय को स्वास्थ्य विभाग में भी लागू किए जाने का आग्रह किया।
साथ ही जिन लोगों को सेवा विस्तार दिया गया है, उसे शीघ्र रद्द करके नए चेहरों को कार्य करने का मौका दिया जाना चाहिए। उनके सामर्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।
चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची शीघ्र हो लागू
प्रदेश में 20 से अधिक बीएमओ और कुछ डिप्टी डायरेक्टर के पद वर्षों से रिक्त चल रहे हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यह सब जानते हुए भी प्रदेश सरकार इन पदों पर स्थायी नियुक्ति नहीं कर रही है।
इसके चलते कई राष्ट्रीय प्रोग्राम चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची शीघ्र लागू की जाने मांग उठाई।
योग्य व्यक्ति को वरिष्ठता के अनुसार प्रमोशन का लाभ शीघ्र दिया जाना चाहिए। प्रदेश मेडिकल आफिसर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. अनुपम वधान ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।