रूई का पैकेट हो या हार्ट में लगाया जाने वाला पेसमेकर। अब मरीजों को इलाज का लगभग हर सामान सस्ता मिलेगा। दवाओं के बाद अब चिकित्सा सामग्री के भी अधिकतम रेट तय होंगे। भारत सरकार तमाम चिकित्सा सामग्री और अन्य उपकरणों को ड्रग्स प्राइस कंट्रोल आर्डर (डीपीसीओ) के दायरे में लाने की तैयारी में है।
हिमाचल सरकार ने केंद्र के इस फैसले का समर्थन करते हुए अपने सुझाव भेज दिए हैं। ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के बाद देश भर में 300 से अधिक दवाओं की कीमतों में 20 से 80 फीसदी तक की कमी आई थी। ठीक उसी तरह से अब मेडिकल डिवाइसेज की कीमतों को भी इसके तहत लाकर नियंत्रित करने की तैयारी है।
ड्रग्स एंड कॉस्मेस्टिक एक्ट में होगा संशोधन
इसके लिए देश भर के तमाम चिकित्सा उपकरण निर्माताओं, आयातकों और विक्रेताओं से ऐसे तमाम उपकरणों की कीमतों का ब्योरा मांगा गया है। इसमें प्रोडक्ट का नाम, कंपोजीशन, पैक साइज और अधिकतम परचून मूल्य की जानकारी शामिल है।
इनकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार अब ड्रग्स एंड कॉस्मेस्टिक एक्ट में संशोधन करने जा रही है। संशोधन के बाद नया ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर निकाला जाएगा।
इससे चिकित्सा उपकरणों की कीमतें नियंत्रित होंगी। अभी तक देश भर में केवल 14 मेडिकल डिवाइसेज की ही अधिकतम कीमत तय है। इन्हीं पर डीपीसीओ लागू होता है।
प्रदेश सरकार ने किया समर्थन
इनमें डिस्पोजेबल हाइपोडर्मिक सीरिंजेंस, डिस्पोजेबल हाइपोडर्मिक निडल्स, डिस्पोजेबल परफ्यूजन सेट, एचआईवी-एचबीएसएजी-एसीवी इन विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइसेज, कार्डिक स्टंट, ड्रग एल्यूटिंग स्टंट, कैथेटर्स, इंट्रा ओकुलर लेंस, आईवी कैनुला, बोन सीमेंट, हार्ट वॉल्व्स, स्कॉल्प वेन सेट, ऑर्थोपेडिक इंप्लांट्स और इंटरनल प्रोस्थेटिक रिप्लेसमेंट शामिल हैं।
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय के सहायक दवा नियंत्रक कपिल धीमान ने बताया कि भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित संशोधन के लिए मांगे गए सुझावों को भेज दिया है। प्रदेश सरकार ने इसका समर्थन किया गया है। ज्यादातर चिकित्सा उपकरणों की कीमतें निर्धारित होने से आम लोगों को फायदा होगा। भारत सरकार एक्ट में संशोधन करने जा रही है। उसी के बाद यह संभव होगा।