पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे प्रशिक्षुओं के खाने में कीड़े और मरी हुई मक्खियां निकल रही हैं। हॉस्टल की मैस में यह खाना परोसा जा रहा है। मैस में एक प्रशिक्षु से हर माह 6000 रुपये डाइट के लिए जा रहे हैं, खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अब प्रशिक्षुओं ने इसे खाने से मना कर दिया है।
प्रशिक्षुओं के अभिभावकों ने इसकी शिकायत कॉलेज प्रबंधन से की है। अभिभावकों का प्रतिनिधिमंडल कॉलेज प्रबंधन से मिला और इसकी शिकायत की है। अभिभावक एडवोकेट कुलदीप डोगरा, मीना, मनोज, वीसी शर्मा, त्रिलोक सिंह, अजय, कपिला सूद, मनु, सुनील, ऐ खुरान और एस. अग्रवाल ने बताया कि चंबा मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षुओं को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
हॉस्टल में फर्नीचर का बुरा हाल है। खाने के नाम पर कीड़ों और मरी मक्खियों वाला खाना दिया जा रहा है। खाने के बदले एक प्रशिक्षु से 6000 रुपये प्रतिमाह लिए जा रहे हैं। जो खाना हॉस्टल में दिया जा रहा है। प्रशिक्षु उस खाने को खाने से मना कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि खाने की जांच के लिए गठित कमेटी भी नियमित रूप से बच्चों के खाने की जांच नहीं कर रही है।
जबकि कमेटी का सप्ताह में एक बार खाने की जांच करना अनिवार्य है। जो प्रशिक्षु खाने की गुणवत्ता की शिकायत कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की और से उन्हें डराया धमकाया जा रहा है। इसके चलते अभिभावकों ने खाने की शिकायत को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन, राष्ट्रपति, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य निदेशालय को ज्ञापन भेजा है।
छह माह की मैस फीस भरने का बना रहे दबाव
मेडिकल कॉलेज की ओर से अभिभावकों पर हॉस्टल की छह माह की फीस 36000 रुपये एडवांस में भरने का दबाव बनाया जा रहा है। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने ऑर्डर जारी किए हैं। प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में एडवांस फीस नहीं ली गई है। चंबा में ही इस प्रकार से अभिभावकों और प्रशिक्षुओं पर दबाव बनाया जा रहा है। यह नियमों से परे है।
कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे हैं 100 प्रशिक्षु
मेडिकल कॉलेज चंबा के पहले सत्र में एमबीबीएस के 100 प्रशिक्षु प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन प्रशिक्षु चिकित्सकों को खराब खाना ही परोसा जा रहा है। जिसका इनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।
कमेटी नियमित रूप से करती है जांच
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनिल ओहरी ने बताया कि हॉस्टल के खाने की जांच को लेकर एक टीम गठित की गई है। जोकि नियमित रूप से हॉस्टल के खाने की जांच करती है। उसके बाद भी खाने में कोई कमी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।