मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने हिमाचल को बड़ा झटका दिया है। राज्य के दोनों सरकारी मेडिकल कॉलेजों आईजीएमसी और टांडा में एमबीबीएस की सीटें घटाने की सिफारिश एमसीआई ने की है।
आईजीएमसी को सीटें 65 से 100 करने की मंजूरी 5 साल पहले मिली थी। टांडा में चार साल पहले सीटें 50 से 100 की गई थीं। अब एमसीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सिफारिश की है कि इस मंजूरी को रिन्यू न किया जाए।
एमसीआई ने अपनी वेबसाइट पर सोमवार को मिनट्स जारी किए। इसमें कहा गया है कि टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए ये पत्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को 28 अप्रैल और आईजीएमसी को लेकर 17 मई को भेजा गया है।
यह फैसला किन तथ्यों के आधार पर लिया गया है? ये नहीं बताया गया है। आईजीएमसी में सीटें 65 से 100 होने के बाद पांचवां सेमेस्टर चल रहा है, जबकि टांडा में चौथा सेमेस्टर है। यदि एमसीआई की ये सिफारिशें लागू हुईं तो आईजीएमसी में अगले साल 65 और टांडा में 50 सीटों पर ही एडमिशन होगा।
हिमाचल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बजाय एक निजी मेडिकल कॉलेज को 150 सीटें देने के बाद से एमसीआई के फैसलों पर सवाल उठ रहे थे। अब काउंसिल की ताजा सिफारिशें कई संदेह पैदा कर रही हैं। हालांकि, अभी राज्य सरकार के पास केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने तथ्य रखने का मौका है।
हमें एक मौका दिया जाए
प्रदेश के दोनों मेडिकल कॉलेजों के लिए एमसीआई की ओर से जो भी आपत्तियां उठाई गई हैं, उन्हें दूर किया जाएगा। वैसे भी गलतियों को ठीक करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक मौका हमें दिया जाएगा।
इसे लेकर मैने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में बात कर ली है। हिमाचल को कोई अड़चन नहीं आने दी जाएगी।
विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य